
बैतूल – IAS Amanbeer Singh Bais – कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस ने अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए जिले के आदिवासी बाहुल्य अति पिछड़े क्षेत्र को ऐसी सौगात दी है जिसके लिए वह क्षेत्र 75 साल से तरस रहा था। ऐसा इसलिए लिखा जा रहा है क्योंकि वर्ष 1947 में मिली आजादी के 75 वर्षों बाद भी बारिश के दिनों में टापू बन जाने वाले ग्राम जामुनढाना के लोग कैद होकर रह जाते थे। यहां पर पुल का निर्माण कराकर कलेक्टर श्री बैंस ने इतिहास रच दिया है। अब बीमार और घायलों को उपचार के लिए गांव में ही दम नहीं तोडऩा पड़ेगा या फिर उसे उपचार दिलाने अन्य ग्रामीणों को उफनती नदी पार करने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
मूलभूत सुविधाओं से था वंचित ग्राम
आजादी के बाद शाहपुर विकासखंड के पावरझंडा ग्राम पंचायत का जामुनढाना गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित था। यहां तक की इस गांव के दोनों तरफ नदी होने के कारण बारिश में यह गांव टापू बन जाता है। नदी पर पुल नहीं होने के कारण लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करने मजबूर होना पड़ता है। इस गांव की बेबसी की तस्वीर उस समय सामने आई जब एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए 8 लोगों द्वारा खटिया पर लेटाकर अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार कराकर उसे अस्पताल पहुंचाया था।
सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था वीडियो
इस हृदयविदारक दृश्य को ग्रामीणों ने अपने मोबाइल में कैद किया और इसे सोशल मीडिया पर वायरल किया। इस खबर को सबसे पहले सांध्य दैनिक खबरवाणी ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद इस खबर को राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थान मिला। इसका परिणाम यह हुआ कि प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल अधिकारियों की बैठक ली और नदी पर पुल स्वीकृत करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने ग्रामीणों की जिंदगी में लाया अमन
यूं तो आजादी के बाद कई चुनाव हुए और ग्रामीणों को कई विधायक और सांसद सहित आला अधिकारी की भी लंबी फेहरिस्त देखने को मिली। लेकिन इनमें से एक भी ऐसा शख्स नहीं था जो कि ग्रामीणों की इस ज्वलंत समस्या का हल कर सकें। लेकिन अक्सर कहा जाता है कि सभी व्यक्ति एक जैसे नहीं होते हैं। कुछ बिरले होते हैं जो कि दूसरो की समस्या को ना सिर्फ महसूस करते हैं बल्कि समस्या का हल करने के लिए जी-जान एक कर देते हैं। हम यहां पर ऐसे ही संवेदनशील, कत्र्तव्यनिष्ठ और परानुभूति से लबरेज डायरेक्टर आईएएस कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस की बात कर रहे हैं जिन्होंने इस समस्या के सामने आते ही तत्काल प्रभाव से बजट नहीं होने के बावजूद भी खनिज मद से नदी पर पुल स्वीकृत करा दिया है ताकि ग्रामीणों को उफनती नदी के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर ना होना पड़े।
पुल-पुलिया विहीन नदियों का बना रहे स्टीमेट:कलेक्टर
इस मामले में कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस का कहना है कि इस वर्ष बैतूल जिले में औसत से अधिक बारिश हो गई है। ऐसी स्थिति में अनेक जगह से सूचना प्राप्त होरही है कि नदी नाले उफान होने की वजह से पुल पुलिया के अभाव में हेल्थ सर्विस में बाधा उत्पन्न हुई है। हम लोगों ने ऐसे सभी मामलों में संज्ञान लिया है और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के माध्यम से स्टीमेट तैयार करवा रहे हैं। जिन जगहों पर डिस्ट्रिक लेवल के फण्ड से पुल पुलिया निर्माण करवा सकते हैं उन जगहों पर अतिशीघ्र निर्माण कार्य शुरू करवा रहे हैं।
तीन नदी पर होंगे पुल निर्माण
जिला पंचायत बैतूल के सीईओ अभिलाष मिश्रा ने बताया कि बैतूल जिले के तीन विकासखंडों में तीन पुल बनाने के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने बताया कि शाहपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत पावरझंडा में खनिज मद से 250 लाख रुपए की राशि से मेन रोड से जामुनढाना के बीच में सूखी नदी पर ब्रिज निर्माण किया जाएगा। भीमपुर विकासखंड के उत्ती ग्राम पंचायत में खनिज मद से 273.18 लाख राशि से ग्राम उत्ती में गोरखीढाना मार्ग पर उत्ती नदी पर पुल निर्माण किया जाएगा। विकासखंड घोड़ाडोंगरी की ग्राम पंचायत रोझड़ा में खनिज मद से 120.48 लाख की राशि से रोझड़ा से बीजादेही मार्ग लंबाई 1.50 किमी. मय पुलिया का निर्माण किया जाएगा।






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