Guava Benefits:सर्दियों में अमरूद खाना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है लेकिन ज्यादातर लोग इसे ठंडा फल मानकर खाने से कतराते हैं। कई लोग मानते हैं कि अमरूद खाने से खांसी जुकाम बढ़ जाता है जबकि आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर इसे सही तरीके से खाया जाए तो यह उल्टा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और खांसी जुकाम दूर करता है।
अमरूद क्यों है फायदेमंद पाचन से लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता तक
अमरूद में फाइबर की मात्रा काफी ज्यादा होती है जो कब्ज गैस भारीपन और अपच जैसी दिक्कतों को दूर करती है। रोजाना अमरूद खाने से पेट हल्का महसूस होता है और पाचन तंत्र मजबूत होता है। इसमें मौजूद विटामिन सी इम्यूनिटी को बढ़ाकर वायरल संक्रमण से बचाता है। इसलिए इसे ठंड में न खाने की धारणा बिल्कुल गलत है।
क्या सर्दी खांसी में अमरूद खाया जा सकता है एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका
आयुर्वेदिक डॉक्टर प्रतीक अग्रवाल जिनके पास BAMS डिग्री है बताते हैं कि ठंड के मौसम में अमरूद को कच्चा खाने से कभी कभी शरीर की तासीर बिगड़ जाती है और सर्दी बढ़ सकती है। लेकिन अगर अमरूद को हल्का सा सेककर खाया जाए तो उसकी ठंडक खत्म हो जाती है और यह गला और इम्यूनिटी दोनों के लिए दवा जैसा काम करता है।
सर्दियों में अमरूद कैसे खाएं जानें सही देसी तरीका
पहले अमरूद को बीच से दो हिस्सों में काट लें। गैस पर तवा या पैन रखकर इसे हल्का सा गर्म कर लें। कटे हुए हिस्से को नीचे की तरफ करके दो से तीन मिनट तक हल्का सेकें ताकि इसकी तासीर बैलेंस हो जाए। इसके बाद ऊपर से थोड़ा सा सेंधा नमक या काली मिर्च छिड़क दें और गरम गरम ही खाएं। ऐसा करने से अमरूद शरीर पर गर्माहट का असर देता है और खांसी जुकाम से राहत मिलती है।
भूने हुए अमरूद के फायदे गले से लेकर पेट तक राहत
हल्का भुना हुआ अमरूद गले की खराश को शांत करता है और रोज खाने से खांसी में काफी आराम देता है। इसमें मौजूद विटामिन सी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है जिससे ठंड में बार बार होने वाला वायरल संक्रमण दूर रहता है। फाइबर की उच्च मात्रा पेट के लिए बेहद फायदेमंद है और कब्ज गैस व अपच से छुटकारा दिलाती है।
क्या रखें सावधानियां इन गलतियों से बचें
कभी भी खाली पेट अमरूद न खाएं इससे गले में जलन या खराश हो सकती है। अमरूद खाने के बाद ठंडा पानी बिल्कुल न पिएं क्योंकि इससे गले की समस्या बढ़ सकती है। बेहतर है कि हल्का गुनगुना पानी पिया जाए जिससे पाचन भी बेहतर होता है और गला भी सुरक्षित रहता है।





