Ghodadongri Vidhansabha – घोड़ाडोंगरी – भाजपा 9-कांग्रेस 5 बार जीती

2023 के लिए दोनों दलों के उम्मीदवारों की नहीं हुई है घोषणा

Ghodadongri Vidhansabhaबैतूल आदिवासी बाहुल्य घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट का पिछले परिसीमन के बाद स्वरूप बदल गया था। और इस सीट से सारनी क्षेत्र को हटाकर चिचोली विकासखंड को जोड़ दिया गया था जिसके चलते जिले की पांचों सीटों में से सबसे अधिक क्षेत्रफल इस घोड़ाडोंगरी-चिचोली- शाहपुर-भौंरा विधानसभा का हो गया है।

मध्यप्रदेश के गठन के पूर्व हुए दो विधानसभा 1952 और 1957 के समय घोड़ाडोंगरी विधानसभा का अस्तित्व नहीं था। घोड़ाडोंगरी क्षेत्र उस समय बैतूल विधानसभा के साथ जुड़ा हुआ था और 1957 के चुनाव में इस विधानसभा सीट से दो विधायक दीपचंद गोठी और मोहकम सिंग निर्वाचित हुए थे। दोनों ही कांग्रेस के उम्मीदवार थे।

घोड़ाडोंगरी विस के पहले विधायक थे जंगू सिंग | Ghodadongri Vidhansabha

1962 में घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट बनी और इस सीट से पहले विधायक जनसंघ के जंगू सिंग निर्वाचित हुए। जंगू सिंग को 8897 और उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी साधुराम को 3503 वोट मिले थे। इसके बाद 1967 में फिर जनसंघ के उम्मीदवार माडू सिंह 10862 वोट लेकर चुनाव जीते। उन्होंने कांग्रेस के साधुराम को 4700 वोटों से हटाया था। 1972 चुनाव में पहली बार इस सीट से कांग्रेस को सफलता मिली और विश्राम सिंह मवासे ने 12971 वोट लेकर जनसंघ के जंगू सिंह को 7200 वोटों से चुनाव हराया था।

1977 के चुनाव में फिर एक बार जनता पार्टी (जनसंघ) के जंगू सिंग ने कांग्रेस के विश्राम सिंग को 4800 वोटों से हराया। 1980 में भाजपा के ही रामजीलाल उइके ने कांग्रेस के विश्राम सिंह को 3 हजार वोटों से पराजित किया था। 1985 में कांग्रेस की मीरा बाई धुर्वे ने भाजपा के रामजीलाल उइके को 3000 वोट से चुनाव हराया। 1990 में भाजपा के रामजीलाल ने कांग्रेस की हर्षलता सिबलून को 11 हजार वोटों से पराजित किया।

1993 में कांग्रेस के प्रताप सिंह ने लगभग 2800 वोटों से भाजपा के रामजीलाल उइके को हरा दिया। 1998 में भी यही जोड़ी चुनाव मैदान में रही और प्रताप सिंह 7 हजार 500 वोटों से चुनाव जीत गए। 2003, 2008 और 2013 में भाजपा लगातार चुनाव जीतते रहे।

2003 में सज्जनसिंह उइके ने कांग्रेस के प्रताप सिंह को 14 हजार वोटों, 2008 में भाजपा की गीता उइके ने कांग्रेस के प्रताप सिंह को साढ़े 4 हजार वोटों से और 2013 में फिर सज्जन सिंह ने कांग्रेस के ब्रम्हा भलावी को 8 हजार वोटों से पराजित किया था। 2016 में सज्जन सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा के मंगल सिंह ने प्रताप सिंह को 13 हजार वोटों से हराया था।

इस विधानसभा सीट से उपचुनाव लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के ब्रम्हा भलावी ने भाजपा की गीताबाई उइके को करीब 17 हजार वोटों के बड़े अंतर से चुनाव हराया था।

भाजपा को 9 बार, कांग्रेस को 5 मिली जीत

शुरू से ही यह आदिवासी बाहुल्य विधानसभा सीट जनसंघ का गढ़ रही है। बाद में जनसंघ 1977 में जनता पार्टी और 1980 में भारतीय जनता पार्टी हो गई थी। इस विधानसभा सीट से एक उपचुनाव जोड़कर कुल 14 चुनाव हुए हैं। जिनमें 9 बार भाजपा प्रत्याशी जीता है। वहीं 5 बार कांग्रेस को सफलता मिली है। कांग्रेस के विश्राम सिंह, प्रताप सिंह, मीरा धुर्वे और ब्रम्हा भलावी चुनाव जीत पाए हैं।

इस सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और दिल्ली में शासकीय सेवा से त्याग पत्र देकर आए प्रताप सिंह पर कई बार विश्वास जताया। प्रताप सिंह को लगातार 1993, 1998, 2003, 2008 और 2016 के उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी बनाया गया था। कांग्रेस के विश्राम सिंह भी 1972, 1977 और 1980 में उम्मीदवार बने। वहीं कांग्रेस के ब्रम्हा भलावी को कांग्रेस पार्टी ने 2013 और 2018 में लगातार दो बार टिकट दी।

जनसंघ ने जंगू सिंग उइके को 1962, 1972 और 1977 में उम्मीदवार बनाया था। इसी तरह से भाजपा ने इस सीट पर रामजीलाल उइके को 1980, 1985, 1990, 1993, 1998 में एवं उनकी पत्नी गीताबाई उइके को 2008, 2018 में उम्मीदवार बनाया था।

2023 के लिए नहीं खोले कांग्रेस-भाजपा ने पत्ते | Ghodadongri Vidhansabha

2018 में बड़े अंतर से चुनाव जीत कांग्रेस के ब्रम्हा भलावी फिर एक बार इस सीट से दावेदार हैं। पार्टी के सर्वे में इन्हें कमजोर उम्मीदवार बताए जाने की चर्चा राजनैतिक गलियारों में हो रही है। बैतूल में चिकित्सीय सेवा दे रहे डॉ. रमेश काकोड़िया के बारे में यह कहा जा रहा है कि इस बार कांग्रेस पार्टी इस सीट पर उन पर भरोसा कर सकती है।

भाजपा की बात करें तो 2016 डेढ़ साल के लिए उपचुनाव में विधायक निर्वाचित हुए मंगल सिंह को 2018 में मौका नहीं दिया गया था। इसलिए इस बार उनकी उम्मीदवारी तय मानी जा रही है। लेकिन मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य रही एवं इस क्षेत्र से दो बार विधायक रहे सज्जनसिंह की धर्मपत्नी गंगाबाई उइके को भी चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है।

चूंकि अभी तक जो चर्चाओं में नाम आ रहे हैं उसके अनुसार भाजपा बैतूल, भैंसदेही, मुलताई और आमला से महिला उम्मीद्वार नहीं उतार रही है।

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