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वन विभाग में वर्षों से जमे कर्मचारियों-अधिकारियों के तबादले की उठी मांग

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खबरवाणी

वन विभाग में वर्षों से जमे कर्मचारियों-अधिकारियों के तबादले की उठी मांग

समाजसेवी जितेंद्र रावतोले और शौकत अली ने कहा—पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए समय-समय पर हो स्थानांतरण

भोपाल। वन विभाग में लंबे समय से एक ही स्थान अथवा क्षेत्र में पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रेमी जितेंद्र रावतोले और शौकत अली ने विभागीय स्तर पर वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों-अधिकारियों की पदस्थापना की समीक्षा कर नियमानुसार स्थानांतरण किए जाने की मांग उठाई है। दोनों ने कहा कि वन विभाग का कार्य सीधे तौर पर जंगल, वन्यजीव, पर्यावरण संरक्षण और शासकीय वन संपदा की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। ऐसे संवेदनशील विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना को लेकर समय-समय पर प्रशासनिक समीक्षा होना जरूरी है। यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ है और स्थानांतरण नीति के दायरे में आता है, तो उसके मामले में नियमानुसार निर्णय लिया जाना चाहिए।

लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों की हो समीक्षा

समाजसेवी जितेंद्र रावतोले ने कहा कि वन विभाग में पदस्थापना को लेकर पारदर्शी व्यवस्था होना जरूरी है। उन्होंने मांग की कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जिले में लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों की सूची तैयार कर उनकी सेवा अवधि, वर्तमान पदस्थापना तथा लागू स्थानांतरण नियमों के अनुसार समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी कर्मचारी या अधिकारी पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं है। मांग केवल इतनी है कि शासन की स्थानांतरण नीति और विभागीय नियम सभी पर समान रूप से लागू हों। जिन कर्मचारियों-अधिकारियों का स्थानांतरण नियमानुसार आवश्यक है, उनके मामलों में विभाग को उचित निर्णय लेना चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण में निष्पक्ष व्यवस्था जरूरी

शौकत अली ने कहा कि वन क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण होती है। जंगलों की सुरक्षा, अवैध कटाई पर नियंत्रण, वनभूमि की निगरानी, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े कार्यों में विभागीय अमले की भूमिका अहम रहती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थापना को लेकर यदि आम नागरिकों के बीच सवाल उठते हैं, तो विभाग को पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की कि पदस्थापना की अवधि की जांच कर नियमानुसार स्थानांतरण की प्रक्रिया अपनाई जाए।

किसी पर आरोप नहीं, नियमों के पालन की मांग

रावतोले और अली ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी विशेष अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध आरोप लगाने के उद्देश्य से नहीं है। उनका कहना है कि यदि किसी कर्मचारी की पदस्थापना नियमों के अनुरूप है तो उसे लेकर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वहीं यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी का कार्यकाल निर्धारित नियमों से अधिक हो चुका है, तो विभाग को शासन की नीति के अनुसार उसकी पदस्थापना की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में समय-समय पर स्थानांतरण का उद्देश्य विभागीय कार्यों में निष्पक्षता, कार्यक्षमता और जवाबदेही बनाए रखना होता है। इसलिए वन विभाग में भी लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अमले की समीक्षा आवश्यक है।

वन संपदा की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण

बुरहानपुर जिले में वन क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। वन क्षेत्र में पेड़ों की सुरक्षा, अवैध कटाई और अतिक्रमण पर निगरानी, वन्यजीवों का संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। ऐसे में विभागीय व्यवस्था मजबूत और पारदर्शी रहना जरूरी है। समाजसेवियों ने कहा कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए विभागीय कामकाज को लेकर जनता का विश्वास बना रहे, इसके लिए पदस्थापना और स्थानांतरण संबंधी नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

वरिष्ठ अधिकारियों से जांच और कार्रवाई की मांग

जितेंद्र रावतोले और शौकत अली ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि जिले में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों एवं अधिकारियों का रिकॉर्ड देखा जाए। उनकी पदस्थापना अवधि और स्थानांतरण संबंधी लागू नियमों की समीक्षा की जाए तथा जो अधिकारी-कर्मचारी स्थानांतरण के लिए पात्र हों, उनके संबंध में नियमानुसार निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि विभाग इस संबंध में पारदर्शी तरीके से समीक्षा करता है तो इससे न केवल कर्मचारियों की पदस्थापना व्यवस्था स्पष्ट होगी, बल्कि आम जनता के बीच भी विभाग के प्रति विश्वास मजबूत होगा। हालांकि, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ बिना प्रमाण आरोप लगाना उचित नहीं है। इसलिए संबंधित मामलों में विभागीय रिकॉर्ड, शासन की स्थानांतरण नीति और सक्षम अधिकारी के निर्णय के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। समाजसेवियों ने उम्मीद जताई कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मांग को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार आवश्यक समीक्षा करेंगे और जहां स्थानांतरण जरूरी हो, वहां पारदर्शी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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