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रिसर्च से इलाज तक, हर मोर्चे पर आगे! Delhi AIIMS को मिला ग्लोबल रैंक

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दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस (Delhi AIIMS) को ‘वर्ल्ड्स बेस्ट हॉस्पिटल्स 2025’ रिपोर्ट में दुनिया के 100 बेहतरीन अस्पतालों में जगह मिली है। न्यूज़वीक और स्टैटिस्टा की इस ग्लोबल रिपोर्ट में एम्स दिल्ली को 97वां स्थान मिला है। साल 2023 में यह संस्थान 122वें स्थान पर था, जबकि 2024 में यह 113वें स्थान पर पहुंचा था। यानी दो साल में एम्स ने 25 पायदान की छलांग लगाई है।

यह रैंकिंग दुनियाभर के 30 देशों के 2,400 से अधिक अस्पतालों के प्रदर्शन के आधार पर तैयार की गई है। इसमें मरीजों की संतुष्टि, क्लीनिकल आउटकम, स्वच्छता मानक और दुनिया भर के डॉक्टर्स की सिफारिशों को ध्यान में रखा गया है।

भारत के तीन अस्पताल शामिल टॉप-250 में

Delhi AIIMS के अलावा भारत के दो और अस्पतालों को टॉप-250 में जगह मिली है। गुरुग्राम स्थित मेदांता – द मेडिसिटी को इस सूची में 146वां स्थान मिला है, जबकि चंडीगढ़ के पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) को 228वां स्थान मिला है। पिछले साल ये दोनों अस्पताल क्रमश: 166वें और 246वें स्थान पर थे।

AIIMS की वैश्विक पहचान और उपलब्धियां

1956 में स्थापित एम्स दिल्ली को भारत का सबसे प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल माना जाता है। यहां पर हाई क्वालिटी वाली स्वास्थ्य सेवाएं किफायती दरों पर दी जाती हैं। इस अस्पताल का टॉप-100 में आना भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती और वैश्विक स्तर पर बढ़ती पहचान को दर्शाता है।

मेदांता और PGIMER की भी सराहना

PGIMER, जो 1962 में शुरू हुआ था, को भी इस सूची में शामिल किया गया है। वहीं, मेदांता जैसे प्राइवेट अस्पताल ने भी कार्डियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और ट्रांसप्लांट सर्जरी जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन के कारण अपनी जगह बनाई है।

कौन है पहले नंबर पर?

2025 की रैंकिंग में अमेरिका का मेयो क्लिनिक पहले स्थान पर है। इसके बाद क्लीवलैंड क्लिनिक (अमेरिका), टोरंटो जनरल हॉस्पिटल (कनाडा), जॉन्स हॉपकिन्स हॉस्पिटल (अमेरिका) और करोलिंस्का यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल (स्वीडन) को शीर्ष पांच में जगह मिली है।

मेडिकल टूरिज्म में भी भारत का नाम

भारत लगातार मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। साल 2022 में भारत का यह सेक्टर करीब 9 अरब डॉलर का था और सरकार की ‘Heal in India’ पहल के तहत इसे 2026 तक 13 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। एम्स जैसे संस्थान भारत को वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर रहे हैं।

 

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