Causes Of Brain Stroke In Hindi: ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर बीमारी है, जो बिना चेतावनी के किसी की भी जिंदगी पलट सकती है। कई मामलों में ब्रेन स्ट्रोक इतना तेज होता है कि मरीज को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अचानक आने वाले स्ट्रोक से पहले शरीर कुछ संकेत जरूर देता है। अगर इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो जान बचाई जा सकती है।
ब्रेन स्ट्रोक क्या होता है
ब्रेन स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग तक पहुंचने वाली नसों में खून का बहाव रुक जाता है या नस फट जाती है। इससे दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता और वे तेजी से डैमेज होने लगती हैं। यही स्थिति आगे चलकर ब्रेन डेड या अचानक मौत का कारण बन सकती है।
ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य कारण
डॉक्टरों के मुताबिक ब्रेन स्ट्रोक कोई एक दिन में होने वाली बीमारी नहीं है। यह धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करता है। खराब खानपान, ज्यादा तला-भुना खाना, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, एक्सरसाइज की कमी, मोटापा, ज्यादा शराब पीना, तनाव और पारिवारिक इतिहास इसके बड़े कारण माने जाते हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना भी जोखिम बढ़ाता है।
चेहरे में अचानक बदलाव
ब्रेन स्ट्रोक का पहला और सबसे साफ संकेत चेहरे पर दिखता है। अचानक चेहरे का एक हिस्सा लटकने लगता है या मुंह टेढ़ा हो जाता है। मुस्कुराने पर दोनों तरफ एक जैसा भाव न आए तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
हाथ-पैर में कमजोरी और बोलने में दिक्कत
अगर अचानक हाथ या पैर में ताकत नहीं रह जाए, चीजें पकड़ने में दिक्कत हो या हाथ-पैर सुन्न लगें, तो इसे नजरअंदाज न करें। कई बार मरीज ठीक से बोल नहीं पाता, शब्द साफ नहीं निकलते या बात समझ में नहीं आती। यह ब्रेन स्ट्रोक का अहम शुरुआती लक्षण है।
तेज सिरदर्द और चलने में परेशानी
बिना किसी वजह अचानक तेज सिरदर्द होना भी स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। इसके साथ चक्कर आना, चलने में लड़खड़ाहट या पैरों का कांपना भी गंभीर लक्षण हैं। कुछ लोगों को अचानक संतुलन बनाने में दिक्कत होने लगती है।
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समय पर पहचान ही बचाव है
डॉक्टरों का साफ कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक के बाद हर मिनट कीमती होता है। अगर ऊपर बताए गए लक्षण दिखें, तो घरेलू इलाज या देरी बिल्कुल न करें। तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें। सही समय पर इलाज मिलने से जान भी बच सकती है और मरीज दोबारा सामान्य जिंदगी जी सकता है।
सेहत के मामले में लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए शरीर के इन देसी संकेतों को समझें और समय रहते एक्शन लें, क्योंकि सावधानी ही सबसे बड़ा इलाज है।





