Bihar Assembly Election Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों की तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। शुरुआती रुझानों में ही यह दिखने लगा कि जेडीयू–बीजेपी गठबंधन एक बार फिर बिहार की सत्ता में वापसी कर रहा है। इस चुनाव में नीतीश कुमार की जेडीयू सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि बीजेपी ने भी नज़दीकी मुकाबला दिया।बिहार में जेडीयू दफ्तर पर जश्न का माहौल है और माना जा रहा है कि नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे। एनडीए लगभग 200 सीटों के आसपास पहुँच रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिहार की जनता ने एक बार फिर नीतीश कुमार पर इतना भरोसा क्यों जताया?
महिलाओं पर खुलकर मेहरबानी
चुनाव से ठीक पहले नीतीश सरकार ने महिलाओं के लिए तिजोरी खोल दी। गेस्ट टीचर्स, जीविका दीदी और कई अन्य महिला लाभार्थियों के खातों में सीधे 10,000 रुपये की सहायता राशि भेजी गई। यह फैसला महिलाओं में नीतीश की लोकप्रियता को और मजबूत कर गया। विपक्ष ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
महिला वोट बैंक ने दिल खोले
एग्जिट पोल्स के अनुसार, बिहार की 40% से अधिक महिलाओं ने नीतीश कुमार को अपनी पहली पसंद बताया। महिलाओं में नीतीश की साफ-सुथरी और संवेदनशील छवि ने उन्हें विपक्ष से काफी आगे कर दिया। शराबबंदी, साइकिल योजना, स्कूल में लड़कियों की सुविधा जैसी योजनाएँ महिलाओं के दिल में आज भी जगह बनाए हुए हैं।
जनता के बीच जुड़े रहे नीतीश
इस बार नीतीश कुमार ने चुनाव अभियान में मीडिया से दूरी बनाए रखी, जिससे वे विवादों से बच गए। वे सीधे जनता के बीच रहे—शोर नहीं, काम पर फ़ोकस। विपक्ष लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगाता रहा, लेकिन जनता ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। नीतीश का शांत, सादगीपूर्ण और विकासवादी चेहरा लोगों को ज़्यादा भरोसेमंद लगा।
महिलाओं को सत्ता में हिस्सेदारी
बिहार में महिलाओं के नेतृत्व पर लंबे समय से काम कर रहीं शाहिना परवीन के अनुसार, आज की बिहार की महिला सिर्फ जाति या भाषा की राजनीति नहीं देखती।नीतीश कुमार ने उन्हें योजनाएँ ही नहीं दीं बल्कि पंचायत और स्थानीय निकायों में सीधी हिस्सेदारी देकर निर्णय लेने की शक्ति भी दी। इसी कारण महिलाएं नीतीश को अपना “सबसे भरोसेमंद नेता” मानती हैं।
Read Also:Bigg Boss 19 में भड़के शहबाज बदेशा, बोले – “सीधे उसे ही विनर बना दो…” आखिर क्या हुआ शो में?
2025 में भी असर दिखा शराबबंदी का
2016 में लागू शराबबंदी आज भी नीतीश का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जाता है। सर्वे बताते हैं कि शराबबंदी से घरेलू हिंसा में 35% की कमी और महिलाओं की बचत में 22% की बढ़ोतरी हुई।
यह मुद्दा 2025 में भी महिलाओं के बड़े वर्ग को नीतीश के पक्ष में ले आया।





