Bhojan Shala Survey | धार भोजशाला में बनी मस्जिद का भी होगा सर्वे

कोर्ट के आदेश से हिंदू पक्ष को मिली बड़ी जीत

Bhojan Shala Surveyइंदौर धार भोजशाला मामले में लगी याचिका पर 19 फरवरी को सुनवाई होने के बाद हाईकोर्ट इंदौर डबल बैंच ने ऑर्डर सुरक्षित रख लिया था। इसे सोमवार को जारी किया गया। इसमें हिंदू पक्ष की याचिका को मंजूर करते हुए पूरे भोजशाला व कमाल मौलाना मस्जिद की वैज्ञानिक तरीक सर्वे – खुदाई करने का आदेश दिया गया है। एएसआई को छह सप्ताह में यह रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करने के लिए कहा गया है।

इस मामले में पक्षकार मोहित गर्ग ने बताया कि हाईकोर्ट ने यह कहा आदेश में हाईकोर्ट ने अपने आदेश के प्वॉइंट 29 में कहा है कि पूरे भोजशाला व कमाल मौलाना मस्जिद परिसर का सर्वे, उत्खनन नई वैज्ञानिक पद्धित से किया जाए। इसमें जीपीएस, जीपीआर तकनीक के साथ कार्बन डेटिंग व अन्य नई तकनीक से पूरा सर्वे किया जाए। परिसर की बाउंड्रीवाल से 50 मीटर दूरी तक सर्वे किया जाए। इस सर्वे के लिए रएसआई के सीनियर अधिकारी की कमेटी होनी चाहिए। सर्वे कार्य की पूरी वीडियोग्राफी हो। परिसर के हर बंद पड़े कमरे, खुले परिसर, खंबे सहित सभी का पूरी तरह से विस्तार सर्वे किया जाए। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन व विनय जोशी ने कहा कि हमारी याचिका स्वीकर हो गई है। बाकी मुद्दे पर हाईकोर्ट रिपोर्ट आने पर फैसला करेगा।

समाजसेवी मोहित गर्ग ने बताया कि हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ट्रस्ट की ओर से विशेष तौर से अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन ने पक्ष रखा। ज्ञात हो कि श्री जैन ही काशी विश्वनाथ के ज्ञानवापी और मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि के मामले में हिन्दु पक्ष के वकील है। अधिवक्ता ने पक्ष रखा कि हम यहां पर कोई स्वामित्व टाइटल, कब्जा नहीं मांग रहे हैं, हम चाहते हैं कि हमे वरशिप एक्ट 1958 के तहत पूजा का अधिकार मिले।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ट्रस्ट, रंजना अग्निहोत्री, मोहित गर्ग, आशीष गोयल, आशीष जनक, जितेंद्र बिसने, सुनील सास्वत ने याचिका दायर की है। इसमें केंद्र सरकार, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ( एएसआई), आर्कियोलॉजिकल ऑफिसर, मप्र सरकार, जिला कलेक्टर, एसपी, मौलाना कमालुद्दीन थ्रू इट्स प्रेसीडेंट अब्दुल समद खान, श्री महाराजा भोजशाला संस्थान समिति को पार्टी बनाया गया है।

मुस्लिम पक्ष का मानना है कि यहां कमाल मौलाना की दरगाह है। यह मस्जिद ही है और 1985 के वक्फ बोर्ड बनने पर उनके आर्डर में इसे जामा मस्जिद कहा गया है। इसलिए यह हमारा धर्मस्थल है। अलाउद्दीन खिलजी के समय 1307 से ही यह हमारा स्थल है, उन्हीं के समय से मस्जिद बनी हुई है। रिकार्ड में भोजशाला के साथ कमाल मौला की मस्जिद लिखा हुआ है। यह पूरा स्थल हमारा है।

हिंदू संगठनों का कहना है कि यह परमार वंश के राजा भोज द्वारा बनवाया गया विश्वस्तरीय स्कूल था। यहां पर इंजीनियरिंग, म्यूजिक, आर्कियोलॉजी व अन्य विषय की श्रेठ पढ़ाई होती थी और इसकी प्रसिद्धी का स्तर नालंदा, तक्षशिला जैसा ही था।
यह सन् एक हजार में स्थापित हुआ था। यहां मां वाग्देवी की प्रतिमा थी। साथ ही यहां पर हिंदू स्ट्रक्चर के पूरे साक्ष्य मौजूद हैं। खंबों पर हिंदू संस्कृति की नक्काशी है, संस्कत व प्राकृत भाषा में शब्द लिखे हुए हैं।

यहां कभी भी मस्जिद नहीं रही है। पुराने रिकार्ड में भी हमेशा भोजशाल शब्द का उपयोग हुआ है।

इसलिए यह स्थल हमारी उपासना का केंद्र है। यह पूरी तरह हमे मिलना चाहिए। हिंदू पक्ष का यह भी तर्क है कि जिन कमाल मौलान की यहां मजार बताई जाती है, वह तो धार में कभी दफनाए ही नहीं गए। आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया ने पहले यहां खुदाई भी की थी। उस समय भी हिंदू स्थल के सबूत मिले थे, लेकिन फिर रोक दी गई। इसलिए यह खुदाई यहां की और दरगाह स्थल की भी होना चाहिए, इससे सब साफ हो जाएगा।

यह भी तथ्य कहा जाता है कि अलाउद्दानी खिलजी ने 1300 में हमला किया था और फिर 1540 में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर हमला किया था। इस दौरान दरगाह बनाई गई, जो वास्तव में है ही नहीं। जबकि यह स्थल मूल रूप से वर्ष 1034 में राजा भोज द्वारा तैयार कराया गया शिक्षण संस्थान था।

साल 1902-03 के दौरान लार्ड कर्जन ने धार,. मांडू की दौरा किया था, तब भोजशाला में मेंटनेंस के लिए 50 हजार राशि खर्च करने के आदेश दिए थे। एएसआई की तब की रिपोर्ट में भोजशाला वर्णन है, साथ ही लिखा है कि यहां संस्कृत, प्राकृत भाषा में लिखे शब्द हैं।

साल 1951 के नोटिफिकेशन में इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है और इसमें भोजशाल व कमाल मौला की मस्जिद शब्द लिखा हुआ है। साल 1935 में तत्कालीन धार महाराज ने यहां पर विवादों को देखते हुए साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए नमाज की मंजूरी दे दी थी। साल 1944 में यहां दंगे भी हुए।

बाबरी कांड के बाद जयभान सिंह पवैया ओर साध्वी ऋताम्भरा ने यहां 1993, 1994 में आंदोलन किया।
-1995 में विवाद पर तत्कालीन जिला कलेक्टर सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आदेश जारी किया कि मुस्लिम हर शुक्रवार को नमाज अदा करेंगे और हिंदू साल में सिर्फ एक बार बसंत पंचमी पर पूजन कर सकेंगे।

साल 2003 में प्रवीण तोगडिय़ा ने यहां पर आंदोलन किया। इस दौरान तत्कालीन कलेक्टर संजय दुबे के साथ धक्का मुक्की भी हुई। इसके बाद फिर नया आदेश निकाला। इसमें व्यवस्था की गई की हिंदू मंगलवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजन कर सकेंगे और मुस्लिम हर शुक्रवार को दोपहर एक से तीन नमाज अदा कर सकेंगे। साथ ही बसंत पंचमी के दिन हिंदू पूजा कर सकेंगे।

एक तथ्य यह भी कहा जाता है कि यह 0.405 हेक्टयर का एरिया मूल रूप से सर्वे नंबर 313 ( ओल्ड व न्यू सर्वे नंबर 604 ) भोजशाल से जुड़ा हुआ है। वहीं सर्वे नंबर 302 अलग है। इसमें दरगाह है। इसका भोजशाला से कोई वास्ता नहीं है। – आर्कियोलॉजिकल की रिपोर्ट में भी यह इसके हिंदू स्थल के कई प्रमाण मिले हैं, जैसे कि यहां मुख्य अधिस्थान सुरक्षित है। प्रवेश पर अर्धचंद्रकीय है। भगवान गणेश का भी स्वरूप मिला है। विष्णु का कुर्मावतार के भी चिन्ह मिले हैं।

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