Betul Politics – चुनाव में जिले भर में चले त्रिदेव कांग्रेस के दाव-पेंच

गुटबाजी के नफा नुकसान का कर रहे आंकलन

Betul Politics बैतूल – 2003 से निरंतर 2018 तक प्रदेश की सत्ता से अछूते रहे कांग्रेस को किसानों का कर्जा माफ घोषणा ने 2018 के चुनाव मेंं समाजवादी पार्टी, निर्दलीय एवं बहुजन समाज पार्टी के विधायकों के भरोसे सत्ता के आसान पर पहुंचा दिया था। लेकिन कांग्रेस अपने विधायकों को ही संभाल नहीं पाई और 15 महीने में ही कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक और अन्य 25 विधायकों के विद्रोह के बाद प्रदेश की कमलनाथ सरकार भरभराकर ढह गई। इसके बाद लगा कि अब बची कांग्रेस में एकता रहेगी क्योंकि प्रदेश स्तर पर कांग्रेस में दिग्विजय-कमलनाथ की जोड़ी ही सर्वाेच्च ताकत के साथ दिखाई दी। लेकिन जमीनी स्तर पर फिर भी कांग्रेस में गुटबाजी सिर चढ़कर बोली, बैतूल जिला भी इससे अछूता नहीं रहा। यहां भी अलग-अलग गुटों में बंटी त्रिदेव कांग्रेस का अस्तित्व विद्मान है जिसका खामियाजा कांग्रेस के उम्मीदवारों को होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

एक गुट चाहता था निलय जीते

लंबे समय से जिले में कांग्रेस के एक बड़े वर्ग का नेतृत्व स्व. विनोद डागा करते रहे। लेकिन उनके असामयिक निधन के बाद कांग्रेस के उनके समर्थकों की बड़ी संख्या या तो निष्क्रिय हो गई या साइड लाइन कर दी गई। इसके बावजूद कांग्रेस में उनके समर्थकों का एक बड़ा वर्ग 2023 के चुनाव में भी उनके पुत्र विधायक निलय डागा के साथ है। जो चाहता है कि बैतूल सीट से फिर एक बार निलय डागा चुनाव जीते। और इसके लिए कांग्रेस के एक वर्ग ने कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में कार्य किया। जिसमें बैतूल विधानसभा में रहने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता ही सक्रिय रहे। अन्य विधानसभा के डागा समर्थक कांगे्रसी निलय डागा के समर्थन में प्रचार करते नहीं दिखाई दिए।

कांग्रेस का एक वर्ग पांसे के लिए सक्रिय

पूर्व मंत्री एवं कई बार विधायक रहे मुलताई विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव पांसे के लिए भी कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग काम करता दिखाई दिया। और यह समर्थक वर्ग चाहता था कि किसी भी हालत में सुखदेव पांसे चुनाव जीते। और इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसियों की भीतरघात की कोई खबर सामने नहीं आई। बैतूल विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले कई कांग्रेस पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता जो लंबे समय से सुखदेव पांसे से जुड़े हैं वे भी पूरे चुनाव प्रचार के दौरान मुलताई विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रहे। इस तरह से कांग्रेस का एक वर्ग यह चाहता था कि सिर्फ सुखदेव पांसे ही जीत का सेहरा पहने।

दोनों हारे लेकिन सरकार कांग्रेस की बने

इस चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेसियों का एक नया वर्ग भी उभरता दिखाई दिया। जो चुनाव के दौरान विशेष सक्रिय नहीं रहा। लेकिन चर्चा यह है कि इस वर्ग के कांग्रेसियों की इच्छा यह थी कि यह दोनों ही प्रमुख कांग्रेस उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता चुनाव में सफलता की ओर ना बढ़े लेकिन प्रदेश में जय-जय कमलनाथ हो। अर्थात सरकार कांग्रेस की बने। यदि जिले से कम विधायक निर्वाचित होंगे और सरकार बन गई तो अन्य कांग्रेसियों की भी पूछ परख होगी ऐसा कांग्रेस का यह वर्ग चाहता है। ऐसी चर्चा चुनाव के दौरान आम रही। इस वर्ग में भी पूरे जिले के कांग्रेसियों की बड़ी संख्या मानी जा सकती है। क्योंकि हर विधानसभा के असंतुष्ट, उपेक्षित और कांग्रेस प्रत्याशियों द्वारा उचित भाव-सम्मान ना मिलने के कारण सभी क्षेत्रों में ऐसे कांग्रेस इस गुट में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहे और संचार टेक्रालाजी के माध्यम से एक-दूसरे से लाइव संपर्क में रहे। और प्रत्याशियों की कमजोरियों का आनंद लेते रहे।