पत्रकारवार्ता में अधिवक्ताओं का रखा पक्ष
Betul News – बैतूल – जिला अधिवक्ता संघ ने 25 प्रकरणों को लेकर समयबद्ध सीमा में निराकरण के आदेश पर न्यायालयीन कार्यों से विरक्त होने को लेकर जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष ब्रजकिशोर पांडे (टीटू) ने पत्रकारवार्ता में उन्होंने अधिवक्ताओं का पक्ष रखते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की हड़ताल पक्षकारों को उचित न्याय मिले इसलिए की जा रही है।
२५ तारीख को हड़ताल का आखरी दिन है। इसको लेकर २६ मार्च को राज्य बार काउंसिल की बैठक हो रही है। उसमें आगे की रणनीति तय होगी। श्री पांडे ने बताया कि २५ प्रकरणों को लेकर समयबद्ध सीमा में निराकरण से पक्षकारों को उचित न्याय नहीं मिल पाएगा और ना ही अधिवक्ता इन प्रकरणों में पूरा समय दे पाएंगे। इसी को लेकर अधिवक्ताओं ने न्यायलीन कार्यों से विरक्त होने का निर्णय लिया था।
नहीं दे पाते पर्याप्त समय | Betul News
श्री पांडे ने बताया कि यह आदेश व्यवहारिक नहीं है, कई बार अधिवक्ताओं की एक ही दिन में दो-दो न्यायालयों में पेशी होती है तो वो पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। अधिवक्ताओं के न्यायलीन कार्यों से विरक्त होने के कारण प्रकरणों में गवाही नहीं हो पा रही है। जेल में बंद आरोपियों के जमानत आवेदन नहीं लग पा रहे हैं। ऐसे कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। श्री पांडे ने कहा कि न्यायालय में चल रहे किन्हीं भी प्रकरण की समय-सीमा नहीं होना चाहिए। उन्होंने पक्षकारों से भी अपील की है कि अधिवक्ताओं की हड़ताल के दौरान पक्षकार न्यायालय में पेशी के दौरान उपस्थित हो।
100 प्रकरणों का होना चाहिए निराकरण | Betul News
वरिष्ठ अधिवक्ता अवध हजारे ने न्यायालीन कार्यों से विरक्त होने को लेकर कहा कि जनवरी माह में आदेश हुआ था कि एक साल में 100 प्रकरणों का निराकरण होना चाहिए। इसको लेकर तीन माह में २५ प्रकरणों को लिस्टेट किया जाएगा। समय सीमा में प्रकरणों के निराकरण से पक्षकारों को उचित न्याय नहीं मिलेगा।
श्री हजारे ने कहा कि पक्षकार अधिवक्ताओं पर विश्वास करके उनके पास प्रकरण लाते हैं और ऐसे में अधिवक्ता उन्हें उचित न्याय नहीं दिला पाएगा तो पक्षकारों का भरोसा कम होगा। अधिवक्तागण पक्षकारों के पक्ष में यह निर्णय लिए हैं।
इस मौके पर अधिवक्ता संघ के सचिव अजय सोनी, सहसचिव राजेंद्र गायकवाड़, सदस्य जयदीप रूनवाल, संजय पप्पी शुक्ला सहित अन्य अधिवक्तागण मौजूद थे। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने न्यायालय में लंबित प्रकरणों की संख्या बढऩे को लेकर यह निर्णय लिया है कि अब देखना यह है कि अधिवक्तागणों के कार्य से विरक्त रहने से क्या नतीजा सामने आता है।






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