प्रतिनियुक्ति के बाद भूल गया शिक्षा विभाग, मामला नेमीचंद मालवीय की प्रतिनियुक्ति का
Betul News – बैतूल – शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। कई शिक्षक ऐसे हैं जो प्रतिनियुक्ति पर गए हैं और वापस ही नहीं आए हैं। खास बात यह है कि प्रतिनियुक्ति पर भेजने के बाद उनका मूल विभाग भूल जाता है और प्रतिनियुक्ति लेने वाला विभाग उन्हें छोड़ता नहीं है। ऐसा ही एक मामला आम अध्यापक संघ ने सामने लाया है। जिसमें शिकायत की है कि सहायक शिक्षक नेमीचंद मालवीय अपात्र होने के बाद भी जनशिक्षक के पद पर प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसकी शिकायत भी की गई है। सबसे खास बात यह है कि शिक्षा विभाग से 26 साल पहले प्रतिनियुक्ति पर गए नेमीचंद मालवीय को शिक्षा विभाग ही भूल गया। सबसे खास बात यह है कि नेमीचंद मालवीय 11 डीपीसी के साथ काम कर चुके हैं।

1998 में हुई थी प्रतिनियुक्ति | Betul News
कोतवाली के सामने कोठीबाजार स्थित सुभाष माध्यमिक शाला में सहायक शिक्षक के पद पर पदस्थ नेमीचंद मालवीय की 1998 में प्रतिनियुक्ति बैतूल बीआरसी में जनशिक्षक के पद पर हुई थी। उसके बाद जुलाई 2016 में प्रतिनियुक्ति पर आए शिक्षकों की वापसी कर दी गई। एमएलबी जनशिक्षक केंद्र में पदस्थ नेमीचंद मालवीय को वापसी के बाद व्यवस्था के रूप में प्रभारी जन शिक्षक बनाया गया और वे वर्तमान में जनशिक्षक के पद पर हैं।
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26 साल नहीं पढ़ाया ककहरा

नेमीचंद मालवीय की शिक्षक के पद पर नौकरी लगने का मूल उद्देश्य बच्चों को पढ़ाना था लेकिन 26 साल से नेमीचंद मालवीय ने बच्चों को नहीं पढ़ाया है। जानकार बताते हैं कि बैतूल में राजीव गांधी शिक्षा मिशन (बाद में सर्व शिक्षा अभियान) के तहत 1996 में जिला शिक्षा केंद्र और बीआरसी की शुरूवात हुई थी और 1998 में यहां पर जनशिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। इसी दौरान सुभाष स्कूल में पदस्थ शिक्षक नेमीचंद मालवीय को प्रतिनियुक्ति पर लिया गया था और उन्हें जन शिक्षक बनाया गया था। 2016 में वापसी के बाद भी अधिकारियों की मेहरबानी के चलते उन्हें व्यवस्था में लेने के बाद एमएलबी जनशिक्षक केंद्र में प्रभारी जन शिक्षक बनाया गया।
प्रतिनियुक्ति नियमों की उड़ी धज्जियां | Betul News
सरकारी विभागों में प्रतिनियुक्ति के लिए नियम बनाए गए हैं। इस नियम के तहत दो साल के लिए प्रतिनियुक्ति होती है। अच्छा कार्यकाल होने पर 3 से 4 साल तक कार्यकाल बढ़ाया जाता है। नेमीचंद मालवीय के मामले में प्रतिनियुक्ति नियमों की धज्जियां उड़ गई हैं। आज जब शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा केंद्र के अधिकारियों से प्रतिनियुक्ति के संबंध में उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन जिला पंचायत में बैठक में शामिल होने के कारण उनका पक्ष सामने नहीं आया है।
नियम बदले लेकिन मालवीय नहीं बदला
जानकार बताते हैं कि राजीव गांधी शिक्षा मिशन की शुरूवात में माध्यमिक स्तर तक के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए योजना शुरू की गई थी। और शुरूवाती दौर में सहायक शिक्षकों को जन शिक्षक बनाया गया था। लेकिन 2012 में विभाग ने नियम बदले और माध्यमिक एवं उच्च शिक्षक को जन शिक्षक बनाने का प्रावधान किया गया। नेमीचंद मालवीय का इन 11 डीपीसी पर 26 साल में ऐसा प्रभाव रहा कि नियम बदल गए लेकिन वो नहीं बदला।
इन डीपीसी के साथ कर चुका कार्य | Betul News

बैतूल में सबसे पहले जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) जीपी महस्की की नियुक्ति 6 अप्रैल 1995 में हुई थी। इन्हीं के कार्यकाल में प्रतिनियुक्ति पर जन शिक्षक नियुक्त हुए थे। इन्हीं के कार्यकाल में नेमीचंद मालवीय की नियुक्ति हुई थी। उनके बाद 1996 में एसपी श्रीवास्तव, 2004 में विवेक तिवारी, 2007 में संजीव श्रीवास्तव, 2010 में श्रीमती भानुमति बेलवंशी, 2011 में एसएस चौहान, 2013 में जीएल साहू, 2015 में अशोक पराडक़र, 2019 में आईडी बोडख़े, 2020 में सुबोध शर्मा, 2020 में ही सुनील कुमार बघेल, 2021 में सुबोध शर्मा और 2022 से संजीव श्रीवास्तव डीपीसी हैं।
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