खबरवाणी
आमला में आध्यात्मिक चेतना का संचार: विमान की गति से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है ‘क्रियायोग’ – स्वामी परिपूर्णानंद।
आमला:
श्वास के विज्ञान पर आधारित ‘क्रियायोग’ समस्त आध्यात्मिक साधकों के जीवन को रूपांतरित करने की एक अचूक तकनीक है। श्वास और मन के बीच गहरा संबंध होता है—श्वास मन को प्रभावित करती है और मन श्वास को। इस परस्पर संबंध को समझकर श्वास पर नियंत्रण पाना ही वास्तव में ‘सेल्फ-कंट्रोल’ आत्म-नियंत्रण और ‘सेल्फ-मास्टरी’ आत्म-प्रभुत्व है। जब श्वास पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो जाता है, तो ईश्वरीय दर्शन भी संभव हैं।
ये प्रेरक विचार प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु आचार्य स्वामी परिपूर्णानंद जी गिरी पुरी (उड़ीसा) ने आमला के गायत्री मंदिर परिसर, गोविंद कॉलोनी में आयोजित तीन दिवसीय ‘क्रियायोग ध्यान साधना शिविर’ के दौरान व्यक्त किए। प्रज्ञान मिशन कटक और परमहंस हरिहरानंद क्रियायोग केंद्र भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में साधक शामिल हुए।
इतिहास और आधुनिक प्रासंगिकता
वर्ष 1861 में महान हिमालयी योगी महावतार बाबाजी महाराज ने अपने प्रिय शिष्य लाहिड़ी महाशय के माध्यम से क्रियायोग की इस प्राचीन और गुप्त प्रविधि को हिमालय की गुफाओं से बाहर लाकर आधुनिक समाज को उपकृत किया था। आज गुरुओं की कृपा से यह अनमोल तकनीक दुनिया भर के साधकों के लिए सुलभ है, जिसे अधिकृत आचार्यों द्वारा सरल भाषा में दीक्षित किया जा रहा है।
तीन दिवसीय शिविर का मुख्य घटनाक्रम।
प्रथम दिवस (14 अगस्त): शाम 6 बजे से रात्रि 8 बजे तक स्वामी परिपूर्णानंद जी का विशेष व्याख्यान हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि केंद्रीय विद्यालय वायु सेना स्थल आमला के प्राचार्य एम.एम. कटियार, प्रमुख ट्रस्टी बी.पी. धामोडे, बी.आर. देशमुख और व्यापारी संघ अध्यक्ष अनिल सोनी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। पहले ही दिन लगभग एक सैकड़ा लोगों ने स्वामी जी के वचनों से एक अलौकिक अनुभूति प्राप्त की। द्वितीय दिवस (15 अगस्त): स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर प्रातः 11 बजे से दीक्षा संस्कार संपन्न हुआ। जिसमें दो दर्जन से अधिक नए साधकों ने क्रियायोग की दीक्षा ली। सहभोज के पश्चात दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक विशेष निर्देशित ध्यान एवं तकनीकी अभ्यास का सत्र आयोजित किया गया।
तृतीय दिवस (16 अगस्त): प्रातः 8 बजे से 10 बजे तक चले सत्र में क्रियायोग की विभिन्न कलाओं और ध्यान के प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। 17 अगस्त को आभार सत्र के साथ शिविर का समापन हुआ।
विदेशों में भी गूंज रहा क्रियायोग का संदेश
आमला के शांत वातावरण की सराहना करते हुए स्वामी परिपूर्णानंद जी ने कहा कि यहाँ का परिवेश ध्यान साधना के लिए बेहद अनुकूल है। उल्लेखनीय है कि स्वामी जी अब तक 50 से अधिक विदेश यात्राओं के तहत 25 से अधिक देशों में क्रियायोग के शिविरों का संचालन और दीक्षा दे चुके हैं, तथा उनका अगला शिविर अगले माह ऑस्ट्रेलिया में प्रस्तावित है।
इस अवसर पर अमित दीक्षित ने साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि क्रियायोग केवल पढ़ने या सुनने का विषय नहीं है, बल्कि इसे नियमित अभ्यास से ही पूरी तरह आत्मसात किया जा सकता है।
सम्मान एवं आभार
शिविर के सफल आयोजन में बी.पी. धामोडे, अनिल सोनी, देवेंद्र राजपूत ‘पप्पू’, सुरेन्द्र कापसे, बी.आर. देशमुख, एन.डी. देशमुख, और मनोज विश्वकर्मा आदि का विशेष योगदान रहा।
इस दौरान श्री महावीर हनुमान गौशाला एवं प्रगतिशील व्यापारी संघ आमला द्वारा आचार्य स्वामी परिपूर्णानंद जी और श्री अमित दीक्षित का शॉल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। छिंदवाड़ा से पधारे सुमित जी और नर्मदापुरम से पधारे किरार जी ने भी शिविर संचालन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन मनोज विश्वकर्मा ने किया साधकों के अत्यधिक उत्साह और विशेष आग्रह को देखते हुए क्षेत्र में शीघ्र ही एक और क्रियायोग शिविर आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है।





