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आमला भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी, जनता से विधायक की दूरी भाजपा के गढ़ में लग सकती है सेंध
आमला भारतीय जनता पार्टी का गढ़ कहे जाने वाली विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों सब कुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है क्षेत्रीय विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे को लेकर पार्टी के से विद्रोह के स्वर गूंजते नजर आ रहे हैं आप है कि क्षेत्रीय विधायक का जनसंपर्क की वजह चांद कथित नेताओं और संतों की कठपुतली बनकर रह गए हैं हालत यह है पार्टी के सक्रिय वरिष्ठ कार्यकर्ता खुद कोटा का महसूस कर रहे हैं जबकि विधायक की इर्द-गिर्द रहने वाले ‘चाटुकार’ सत्ता की मलाई काट रहे हैं।
क्षेत्रीय विधायक से सक्रिय कार्यकर्ताओं की नाराजगी पार्टी को पड़ सकती है भारी
पार्टी सूत्रों की माने तो क्षेत्रीय विधायक द्वारा सक्रिय कार्यकर्ताओं एवं आम जनता सीधे संवाद कब नजर आ रहा है नगरी क्षेत्र में राजनीतिक कुछ रसूखदार नेताओं की गुलाम बनती नजर आ रही है कार्यकर्ताओं का कहना है भाजपा का गढ़ कहां जाने वाला विधानसभा क्षेत्र इन दिनों कुछ बिचौलियों द्वारा विधायक के करीबी होने का फायदा उठाकर अपने मुनाफे का कारोबार शुरू कर दिया है यह नाराजगी अब एक ऐसे लावे का रूप ले चुकी है, जो आने वाले समय में भाजपा संगठन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
कार्यकर्ताओं से बनाई दूरी संवाद भी खत्म
यहां जैसा कि बताया जा रहा है कि विधायक की कुछ कथित नेताओं की घेराबंदी के बाद स्थानीय कई संगठन प्रमुख और कार्यकर्ताओं से संवाद लगभग खत्म होते जा रहे हैं, ऐसे में क्षेत्र की समस्याएं और सुनवाई के लिए भी कोई बात नहीं हो पा रही है, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी नाराजी देखी जा रही है। आम आदमी के बीच बढ़ती खाई आगामी चुनाव में मुश्किल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की प्रथम आगमन पर जमकर दिखाई दी गुटबाजी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के प्रथम नगर आगमन पर आयोजित कार्यक्रम विवादों के घेरे में आ गया है। बेल नदी पर 2 करोड़ की लागत से बनने वाले पुल के भूमिपूजन के दौरान संगठन की गुटबाजी खुलकर सामने आई। आरोप है कि कुछ कथित नेताओं ने पूरे सरकारी कार्यक्रम को ‘निजी ईवेंट’ की तरह हाईजैक कर लिया। हद तो तब हो गई जब शहर के प्रथम नागरिक, नगर पालिका अध्यक्ष नितिन गाडरे और स्थानीय पार्षदों को ही कार्यक्रम की सूचना से वंचित रखा गया।कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उईके, विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे और जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार शामिल हुए। हालांकि, कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा नपा अध्यक्ष नितिन गाडरे और इलाके के कई पार्षदों को कार्यक्रम की सूचना नहीं दिए जाने से विवाद खड़ा हो गया। नपा अध्यक्ष गाडरे ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि शहर के प्रथम नागरिक और चुने हुए जनप्रतिनिधियों को जानबूझकर कार्यक्रम से दूर रखा गया, जो पूरे शहर का अपमान है। इस घटनाक्रम से पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखी जा रही है।
निर्माण कार्य शहर में पत्थर पर नाम ग्रामीण जनप्रतिनिधियों
बीते शनिवार बेल नदी पर दो करोड़ की लागत से बनने जा रहे हैं पुल के भूमि पूजन की शिला पर ग्रामीण इलाकों के जनप्रतिनिधियों का नाम अंकित किया गया था, यहां वार्ड पार्षद राकेश शर्मा का नाम भी शिलालेख से गायब कर दिया गया था, ऐसे में नपा अध्यक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा है कि जब शहर में निर्माण कार्य हो रहा है, तो भूमि पूजन के पत्थर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि का नाम होना चाहिए, किंतु उनका नाम गायब कर दिया गया, और जब निर्माण कार्य शहर का था तो पत्थर पर ग्रामीण प्रतिनिधियों का नाम क्यों अंकित किया गया। अब जो भी हो लेकिन जिस तरह से बीते कुछ समय से आमला भाजपा में संस्कार और परंपराओं की एक नई परिपाटी गढ़ी जा रही है, उससे स्थानीय भाजपा को कई तरह की चुनौतियों से भी जूझना पड़ सकता है।
,चेहरा छिपाकर बयां कर रहे दर्द
हैरानी की बात यह है कि
अनुशासन का दम भरने वाली भाजपा के कार्यकर्ता अब मीडिया के सामने (पहचान छिपाकर) अपना मुंह खोलने लगे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर वक्त रहते विधायक के रवैये और इन ‘एजेंटों’ के दखल को कम नहीं किया गया, तो आगामी चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, संगठन के भीतर उठती ये आवाजें इस बात का संकेत हैं कि आमला-सारणी की राजनीति में जल्द ही कोई बड़ा बदलाव या धमाका देखने को मिल सकता है।





