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अतिक्रमण और गंदगी में गुम हो रहा बड़ा तालाब जलभराव क्षमता इतनी की पूरे शहर को निस्तार के पानी के संकट से मिल सकती है निजात

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सांध्य दैनिक खबरवाणी, बैतूल

किसी जमाने में शहर के जलप्रदाय का मुख्य स्रोत रहा बड़ा तालाब अपनी अनदेखी के चलते गुम होने की कगार पर पहुंच गया है। कुछ वर्ष पूर्व तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष अलकेश आर्य द्वारा इसके जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया गया था उस समय तालाब के दो तरफ सीढिय़ों का निर्माण और गहरीकरण समेत अतिक्रमण भी हटाया गया था और यहां नगरपालिका में हर मंगलवार को काम शुरू होने से पहले अध्यक्ष सहित सभी कर्मचारी श्रमदान किया करते थे। पिछले कुछ वर्षों से कुछ वर्षो से इसकी घोर अनदेखी अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद कर रही है और इसके चारों ओर अतिक्रणकारियों ने कब्जाकर कच्चे-पक्के मकानों का निर्माण कर लिया है और अभी भी भराव कर चोरी छिपे कब्जा करने की प्रक्रिया जारी है। इस संबंध में नगरपालिका अध्यक्ष, नगरपालिका सब इंजीनियर, वार्ड पार्षद, जलप्रदाय प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। बैतूल एसडीएम अभिजीत सिंह से खबरवाणी ने जब चर्चा की तो उन्होंने कहा कि यह मेरे संज्ञान में नहीं था अब मैं शीघ्र ही इसकी जानकारी मंगवाकर उचित कार्रवाई करूंगा।
तालाब के किनारे वर्षों पुराना आर्य समाज का मंदिर स्थित है जो पहले बैतूल शहर के लिए बड़ी आस्था का केंद्र हुआ करता था, लेकिन यहां काम्पलेक्स बनने के बाद ये दब सा गया है और तालाब की अनदेखी के साथ ही मंदिर की अनदेखी ने भी इस आस्था के केंद्र को गुमनामी के अंधेरे में ढकेल दिया है। अब इस मंदिर में न तो कोई आता-जाता है और न ही पूजा होती है। यदि मंदिर सुचारू रूप से संचालित होता तो शायद तालाब की भी साफ-सफाई होती और इतनी दुर्गती नहीं होती।ूजा होती है। वर्षों पूर्व कोठीबाजार और टिकारी क्षेत्र की जल आपूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत आज अतिक्रमण और गंदगी की भेंट चढ़ गया है। यदि इसे अभी भी नगरपालिका प्रशासन और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से सहेजा जाए तो कोठीबाजार और टिकारी क्षेत्र की पानी की समस्या को बहुत हद तक हल किया जा सकता है और इस क्षेत्र के बहुत सारे ट्यूबवेल स्वत: ही रिचार्ज भी हो जाएंगे जिनके वर्षों से पानी नहीं है या पानी का स्तर नीचे चला गया है। प्रशासन द्वारा वर्तमान में चलाई जा रही अतिक्रमण हटाओ मुहिम में इसे शामिल कर लिया जाए तो नगर की इस धरोहर को पुन: पुराना स्वरूप मिल सकता है। नगरपालिका यदि चाहे तो इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित कर सकती है और यहां पर छोटा बोट क्लब, चौपाटी का निर्माण करके बेरोजगारों को रोजगार भी दिया जा सकता है।
बारिश में ओवरफ्लो होता है तालाब, लोगों को किया जाता है सतर्क
बड़े तालाब के चारों ओर अतिक्रमण होने के कारण और तालाब में कचरा ज्यादा होने के कारण तालाब का कैचमेंट एरिया कम होता जा रहा है जिसके चलते भारी बारिश की स्थिति में तालाब ओवरफ्लो होने लगता है और आस-पास के क्षेत्रवासियों को हटाया जाता है। यदि तालाब का गहरीकरण कर दिया जाए तो बारिश में ओवरफ्लो की समस्या से भी निजात मिल जाएगी और ज्यादा मात्रा में पानी संग्रहण किया जा सकता है। तालाब की साफ-सफाई होने के बाद किसी व्यवसायिक संस्थान अथवा समिति को इसकी देखरेख और सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

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