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पाटिल की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से दी विदाई
बुरहानपुर जिले के ग्राम बोहोडला में उस समय गमगीन माहौल छा गया, जब स्वर्गीय श्री पाटिल की अंतिम शोभायात्रा निकाली गई। इस दुखद घड़ी में पूरे गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल होने पहुंचे। हर आंख नम थी और हर चेहरा शोक में डूबा हुआ दिखाई दे रहा था।
अंतिम यात्रा में गांव के सभी वर्गों के लोग शामिल हुए। विशेष रूप से केला व्यापारी संगठन के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे और उन्होंने स्वर्गीय श्री पाटिल को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और जनप्रतिनिधि भी शोभायात्रा में पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। बुरहानपुर शहर से भी सैकड़ों लोग बोहोडला पहुंचे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि स्वर्गीय श्री पाटिल का सामाजिक दायरा काफी व्यापक था और वे सभी के प्रिय थे।
यात्रा पूरे गांव में निकाली गई, जहां रास्ते भर लोगों ने फूल अर्पित कर उन्हें अंतिम विदाई दी। वातावरण में शोक और सम्मान दोनों का भाव साफ झलक रहा था। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं सहित हर वर्ग के लोगों ने नम आंखों से अंतिम दर्शन किए और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। इस दुखद क्षण में गांव के लोगों ने एकजुटता दिखाते हुए परिवार को सांत्वना दी और हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान के साथ सम्पन्न किया गया, जिसमें उपस्थित जनसमूह ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
स्वर्गीय श्री पाटिल के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। समाज के लोगों ने उनके सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि उनका जाना एक अपूरणीय क्षति है।
समाजसेवी छवि और मिलनसार व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे श्री पाटिल
स्वर्गीय श्री पाटिल को क्षेत्र में एक सम्मानित और सामाजिक व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। वे हमेशा लोगों के सुख-दुख में शामिल रहते थे और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आते थे। यही कारण रहा कि उनकी अंतिम शोभायात्रा में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति देखने को मिली।
केला व्यापार से जुड़े लोगों ने बताया कि श्री पाटिल का व्यापारिक क्षेत्र में भी विशेष योगदान रहा है। वे हमेशा ईमानदारी और सहयोग की भावना के साथ काम करते थे। उनके साथ काम करने वाले व्यापारियों ने कहा कि उन्होंने न केवल व्यापार को आगे बढ़ाया, बल्कि आपसी भाईचारे को भी मजबूत किया।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी उनके निधन को समाज के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा कि श्री पाटिल जैसे व्यक्ति समाज को जोड़ने का काम करते हैं और उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।
गांव बोहोडला में अंतिम यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन भी सतर्क रहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान शांति व्यवस्था कायम रही और सभी ने अंतिम विदाई दी।
अंत में, सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी और ईश्वर से प्रार्थना की कि उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।





