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भीमपुर विकासखंड में पांच महान क्रांतिकारियों की मूर्ति स्थापना का भव्य आयोजन

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खबरवाणी

भीमपुर विकासखंड में पांच महान क्रांतिकारियों की मूर्ति स्थापना का भव्य आयोजन

रिपोर्ट    प्रदीप यादव भीमपुर

भीमपुर विकासखंड मुख्यालय पर पांच महान क्रांतिकारियों की मूर्ति स्थापना का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। पीपरिया जोड़ के तालाब किनारे स्थित खसरा नंबर 235/1 की जमीन पर यह मूर्ति स्थापना की गई, जहाँ आदिवासी श्री नजर सिंह ने जमीन का दान दिया। इस अवसर पर भीमपुर ब्लॉक में एक बड़ी जनसभा का आयोजन किया गया, जिसमें हरदा, देवास, खंडवा और होशंगाबाद जिलों से भारी संख्या में आदिवासी समाज के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।मूर्ति स्थापित क्रांतिकारीमूर्ति में विष्णु सिंह गोड, सरदार गंजन सिंह कोरकू, वीरांगना रानी दुर्गावती, भगवान बीरसा मुंडा और डॉ भीमराव आंबेडकर की मूर्ति स्थापना की गई आदिवासी समाज के लिए गौरवशाली अवसर के रूप में देखा गया। इस मौके भारी संख्या में रैली निकाली गई, जिसमें नृत्य और गाने का आयोजन किया गया।

राजनेताओं के भाषण

कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री सुखदेव पांसे ने कहा कि सरकार जल, जंगल और जमीन के लिए पेसा एक्ट के नाम पर आश्वासन देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं कर रही है। उन्होंने इंदिरा गांधी की सरकार को धन्यवाद दिया कि उनके कार्यकाल में आदिवासियों की जमीन सुरक्षित रही। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ईमानदार और अहिंसक है, जो हमेशा एकजुट रहेगा।रामू टेकाम ने कहा कि संविधान पर या समाज पर जुल्म होगा तो आदिवासी समाज एकजुट होकर लड़ेगा। उन्होंने उद्योगपतियों के दहेज के लिए मरने की तुलना करते हुए कहा कि आदिवासी समाज नैतिक रूप से मजबूत है। उन्होंने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि सिंगरौली में आदिवासियों की जमीन छीनी गई है, जबकि पेसा एक्ट के तहत जमीन सुरक्षित रहनी चाहिए
यादव समाज के जिला अध्यक्ष भूरा यादव ने शराब न पीने की बात कही, जबकि समाजसेवी जिला अध्यक्ष संतु सूर्यवंशी ने शिक्षा पर ध्यान देने और एकजुट रहने को कहा। उन्होंने आदिवासी समाज को झगड़े से बचने की सलाह दी।

प्रशासनिक उपस्थिति
अपर कलेक्टर वंदना जाट, डिप्टी कलेक्टर अनीता पटेल, एसडीओपी और अन्य अधिकारियों ने कार्यक्रम में शामिलता दिखाई। 7 किलोमीटर की दूरी पर पुलिस ड्यूटी लगाई गई, जिसमें बेरीकेड लगाए गए थे। इससे प्रशासन की चप्पे-चप्पे पर नजर का संकेत मिला।इस आयोजन ने आदिवासी समाज की एकता और अधिकारों की रक्षा के संदेश को बलवान बनाया, जिसे आगे के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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