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काग्रेस संविधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर लोकतांत्रिक मर्यादा का उलंधन कर रही है. महापौर माधुरी पटेल, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से पूछे सवाल

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खबरवाणी

काग्रेस संविधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर लोकतांत्रिक मर्यादा का उलंधन कर रही है. महापौर माधुरी पटेल, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से पूछे सवाल

बुरहानपुर। भारतीय जनता पार्टी जिला बुरहानपुर द्वारा जिला कार्यालय पर एक पत्रकारवार्ता का आयोजन किया गया। इस पत्रकारवार्ता को महापौर श्रीमती माधुरी अतुल पटेल द्वारा संबोधित करते हुवें देश की संविधानिक संस्थाओं पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा निरंतर लगाए जा रहे बेबुनियाद आरोपों और संस्थााओं की कार्यप्रणालीयों को संदेह व्यक्त करना राहुल गांधी की कुठीत मानसीकता करार देते हुवे पर जमकर लगातार कॉग्रेस की हार पर जनता द्वारा नकारे जाने की हताशाा करार दिया। आपने कहा कि कॉग्रेस संविधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर लोकतांत्रिक मर्यादा का उलंधन कर रही है। आपने राहुल गांधी से पांच सवाल भी किए।
पत्रकारवार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज जी माने , जिला महामंत्री श्री चिंतामन महाजन, ईश्वर चौहान, संजय जाधव, शाहपुर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधी श्री विरेन्द्र तिवारी, पूर्व महापौर श्री अतुल भाई पटेल ,जिला मिडिया प्रभारी श्री मुकेश गुलाबचंन्द पुर्वे ,सह मिडिया प्रभारी कृष्णा शाह, किशोर कामठे, अशोक राठौर उपस्थित थे।
महापौर श्रीमती माधुरी अतुल पटेल ने कहा कि कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जनता के बीच छूट और छल और भ्रमित की राजनीति करना छोड़ दें। मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग एवं भारतीय जनता पार्टी का केंद्र सरकार में नेतृत्व कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्पष्ट कर दिया है। वह अपनी कांग्रेस की अनेक राज्यों से हार कर बौखला कर इस प्रकार के आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करते हुए अपनी ओछी मानसिकता को प्रदर्शित कर रहे हैं।
आपने कहा कि झुठे आरोपों के माध्यम से देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के मन में भ्रम और अविश्वास पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन अब चुनाव आयोग ने स्वयं इस पूरे मामले पर स्पष्ट स्थिति सामने रख दी है। 26 सितंबर को चुनाव आयोग की बैठक हुई और तीनों चुनाव आयुक्तों की ओर से संयुक्त रूप से स्पष्ट किया गया कि देशभर में चल रही एसआईआर किसी एक व्यक्ति का निर्णय नहीं है। यह मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय है। ऐसे में सवाल यह है कि जब देश की संवैधानिक संस्था ने स्वयं पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी ह, तो राहुल गांधी और कांग्रेस अब भी किस आधार पर इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के आधार पर राजनीति क्यों:- महापौर माधुरी पटेल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने जिस मीडिया रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर सवाल खड़े किए , चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद उस रिपोर्ट की तथ्यात्मकता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक दलों से अपेक्षा होती है कि वे किसी संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पूरी जांच करें। उन्होंने कहा कि सिर्फ किसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाना और फिर उसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ एक बड़े मुद्दे के रूप में प्रस्तुत करना क्या उचित है। फार्म 6 को लेकर भी स्थिति स्पष्ट एसआईआर प्रक्रिया के तहत फार्म.6 से जुड़े डिक्लेरेशन को लेकर भी सवाल उठाए गए। दस्तावेज़ के अनुसार 27 मई 2026 को माननीय सुप्रीम कोर्ट फार्म 6 से जुड़े इस डिक्लेरेशन को वैध ठहरा चुका है। तो फिर फार्म 6 में मनमाने बदलाव किए जाने का आरोप किस आधार पर लगाया जा रहा है। जब न्यायपालिका का निर्णय सामने है, तब क्या राजनीतिक आरोपों के बजाय न्यायिक प्रक्रिया और तथ्यों का सम्मान
नहीं किया जाना चाहिए:- महापौर ने कहा कि कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे पत्र का वास्तविक संदर्भ कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे गए एक पत्र को भी एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। लेकिन चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वह पत्र किसी नीति अथवा एसआईआर से संबंधित नहीं था, बल्कि डेपुटेशन पर आए एक अधिकारी से जुड़ा आंतरिक प्रशासनिक विषय था। इसलिए एक प्रशासनिक विषय को एसआईआर से जोड़कर राजनीतिक रंग देना कितना उचित हैए यह कांग्रेस नेतृत्व को स्वयंदेश के सामने स्पष्ट करना चाहिए।
ईसीआईनेट की पारदर्शिता :- चुनाव आयोग के । सिस्टम ईसीआईनेट को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि लेकिन यहां भी व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट है। सिस्टम की सुरक्षा और नियमों केअनुपालन की जांच के लिए आईटी और आईआईटी के स्वतंत्र विशेषज्ञों की समिति गठित की गई है। अर्थात तकनीकी व्यवस्था की जांच के लिए भी संस्थागत और विशेषज्ञ स्तर पर प्रक्रिया मौजूद है।
संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल क्यों?
महापौर माधुरी पटेल ने पत्रकार वार्ता में कहा कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा किसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हों। 2024 ईवीएम को ब्लैक बॉक्स बताकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाया।
2019 में ( न्यायपालिका ): चौकीदार चोर है बयान पर सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। 2016.2022 सेना का अपमान: सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगना, खून की दलाली कहना और तवांग झड़प पर सेना का मनोबल गिराना।
विदेशों में देश की बदनामी: अंतरराष्ट्रीय मंचों ( कैम्ब्रिज अमेरिका ) पर जाकर भारतीय न्यायपालिका और लोकतंत्र लोकतंत्र में सरकार या किसी संस्था के निर्णय से असहमति रखने का अधिकार सभी को है। लेकिन असहमति और संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने के प्रयास के बीच अंतर होना चाहिए। राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
कांग्रेस से कुछ सीधे सवाल:- महापौर माधुरी पटेल ने पत्रकार वार्ता में कहा कि आज हम कांग्रेस और राहुल गांधी से कुछ सीधे सवाल पूछना चाहते हैं।
पहला सवाल:- जब चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं, तो राहुल गांधी इस स्पष्ट जवाब के बाद भी अपने आरोपों पर कायम क्यों हैं।
दूसरा सवाल:-जब फार्म 6 से जुड़े डिक्लेरेशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सामने है, तो क्या राहुल गांधी देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था के निर्णय को स्वीकार करते हैं।
तीसरा सवाल:- क्या किसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाना और फिर उसी आधार पर जनता के बीच भ्रम पैदा करना उचित है।
चौथा सवाल:-क्या कांग्रेस चुनाव आयोग सहित देश की संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास करती है या नहीं।
पांचवां सवाल:- यदि चुनाव आयोग ने तथ्यों के साथ अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया हैए तो क्या राहुल गांधी देश के सामने अपने पहले लगाए गए आरोपों पर पुनर्विचार करेंगे।
आपने कहा कि एंटी.इंकम्बेंस की राजनीति पर भी कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए कांग्रेस लगातार चुनावी राजनीति में एंटी.इंकम्बेंसी की बात करती है लेकिन यदि कांग्रेस वास्तव में लोकतांत्रिक जनादेश की बात करती है, तो उसे अपने लंबे चुनावी इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में 1967 के बाद से कांग्रेस सत्ता से बाहर है। पश्चिम बंगाल में 1977 के बाद से कांग्रेस सत्ता में नहीं रही।उत्तर प्रदेश और बिहार में भी कांग्रेस लंबे समय से जनता के जनादेश से दूर है।
इसलिए चुनावी हार का विश्लेषण करने के बजाय हर बार चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठानाकिसी भी राजनीतिक दल के लिए आत्ममंथन का विषय होना चाहिए।
महापौर माधुरी पटेल ने कहा कि मेरा स्पष्ट कहना है कि चुनाव जनता के बीच जाकर सेवा करने, अपने काम और नीतियों के आधार पर जनमत हासिल करने से जीते जाते हैं। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर बिना पर्याप्त तथ्यों के आरोप लगाकर जनता के मन में भ्रम पैदा करनालोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। आज चुनाव आयोग ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। अब समय है कि कांग्रेस और राहुल गांधी भी देश के सामने यह स्पष्ट करें कि वे चुनाव आयोग के सर्वसम्मत निर्णय, न्यायपालिका के निर्णय और देश की संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास करते हैं या नहीं।अंत में मैं राहुल गांधी जी से कहना चाहता हूं । चुनाव जनता के बीच सेवा करने और जनमत से जीते जाते हैं, देश की संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता के मन में अविश्वास पैदा करके नहीं।
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नोट:- $कृ पया उपरोक्त समाचार को आपके प्रसिद्ध समाचार पत्र में प्रकाशीत करने की कृपा करें।

मुकेश गुलाबचंन्द्र पुर्वे
भाजपा मीडिया प्रभारी, जिला बुरहानपुर

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