खबरवाणी
संस्कृति स्कूल का बड़ा खेल, एक यू-डायस कोड पर 5 किमी की दूरी पर चल रही दूसरी स्कूल बिल्डिंग…….
कागजों में पवारगढ़ और बिना मान्यता के सहारे बिना वैधानिक स्वीकृति राजीव गांधी वार्ड में धड़ल्ले से चल रही स्कूल की इमारत….
खबरवाणी सुशील कुशवाह अशोकनगर। जिले में शिक्षा व्यवस्था का चोला ओढ़कर ‘काला कारोबार’ चला रहे शिक्षा माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने और बच्चों के भविष्य का झूठा सपना बेचने वाला संस्कृति एन. इंग्लिश मीडियम स्कूल अब एक बड़े फर्जीवाड़े और कागजी जालसाजी के केंद्र में आ खड़ा हुआ है। हर साल अपना आधिकारिक पता बदलकर नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाने वाले इस स्कूल संचालक की करतूतों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कागजों में कुछ और, धरातल पर कुछ और शिक्षा के इस व्यापार में न तो नियमों का खौफ है और न ही प्रशासन का डर।
सरकारी अभिलेखों और ऑनलाइन पोर्टल के पन्नों को खंगाला जाए तो इस स्कूल का अनोखा ‘मायाजाल’ सामने आता है। यू-डायस प्लस की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2025 की मान्यता में इस स्कूल का पता पवारगढ़ दर्ज है, जबकि वर्ष 2023-24 की मान्यता में यही स्कूल राजीव गांधी वार्ड, अशोकनगर के पते पर दर्ज था।सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक ही यू-डायस कोड का इस्तेमाल करके एक ही नाम से दो-दो इमारतें संचालित की जा रही हैं। डीपीसी कार्यालय की आधिकारिक सूची में केवल एक ही स्कूल का जिक्र है, जबकि हकीकत यह है कि पवारगढ़ और राजीव गांधी वार्ड वाले दोनों परिसरों के बीच लगभग 5 किलोमीटर की दूरी है।बड़ा सवाल यह है कि एक ही मान्यता और एक ही यू-डायस कोड पर दो अलग-अलग जगहों पर स्कूल का संचालन कानूनन अपराध है। पवारगढ़ स्थित परिसर को कागजों में मान्यता प्राप्त दिखाया गया है, जबकि राजीव गांधी वार्ड में चल रही इमारत बिना वैध मान्यता के केवल अभिभावकों की आंखों में धूल झोंकने के लिए चलाई जा रही है।(खबरवाणी समाचार पत्र के पास सभी तथ्य उपलब्ध हैं जरूरत पड़ने पर विभागीय अधिकारी या फिर स्कूल संचालक को भी उपलब्ध कराए जा सकेंगे)
मान्यता की शर्तों को पूरा करने के लिए स्कूल संचालकों ने यू-डायस प्लस पोर्टल पर जो झूठे दावे दर्ज किए हैं, वे किसी धोखाधड़ी से कम नहीं हैं। पोर्टल पर राजीव गांधी वार्ड वाले परिसर में बच्चों के खेलने के लिए बकायदा ‘प्ले ग्राउंड’ (खेल का मैदान) होने की बात कही गई है। लेकिन जब धरातल पर पड़ताल की गई, तो वहां कोई खेल का मैदान नजर ही नहीं आया। खेलकूद और शारीरिक विकास के नाम पर अभिभावकों से लाखों रुपये समेटने वाला यह संस्थान बच्चों को एक चारदीवारी में कैद रखने का काम कर रहा है। फर्जी दस्तावेज तैयार करके मान्यता हासिल करना और पोर्टल पर झूठी जानकारी अपलोड करना इस बात का सबूत है कि स्कूल प्रबंधन के लिए शिक्षा सेवा नहीं, बल्कि केवल कमाई का जरिया है।
यह पूरा फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के रवैये पर उठ रहा है हर साल मान्यता नवीनीकरण से पहले शिक्षा विभाग की टीम भौतिक सत्यापन करती है। क्या अधिकारियों को 5 किलोमीटर दूर चल रही दूसरी इमारत और गायब प्लेग्राउंड दिखाई नहीं दिया । यू-डायस पोर्टल पर फर्जी पते की जानकारी दर्ज होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की यह साफ इशारा करता है कि या तो विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं, या फिर इस ‘काले कारोबार’ में उनकी भी मौन सहमति शामिल है। संस्कृति एन. इंग्लिश मीडियम स्कूल की इस जालसाजी ने अशोकनगर की शिक्षा व्यवस्था के दावों की कलई खोलकर रख दी है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस फर्जीवाड़े की पोल खोलते हुए स्कूल संचालक के खिलाफ कड़ा एक्शन लेता है, या फिर हर बार की तरह यह जांच भी सरकारी फाइलों के अंबार में दबाकर रफा-दफा कर दी जाएगी।





