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नियम ताक पर रखकर सीलबंद अस्पताल को बिना सुधार के पुनः संचालन की अनुमति पर उठे सवाल;

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खबरवाणी

नियम ताक पर रखकर सीलबंद अस्पताल को बिना सुधार के पुनः संचालन की अनुमति पर उठे सवाल;

आयुष्मान घोटाले और प्रशासनिक सांठगांठ की निष्पक्ष जांच की मांग

बुरहानपुर: अमरावती रोड स्थित चर्चित गुड अस्पताल को लेकर एक बार फिर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। पूर्व में गंभीर अनियमितताओं, सुरक्षा मानकों के अभाव और आयुष्मान भारत योजना में करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े के आरोपों के चलते सील किए गए इस अस्पताल को बिना किसी पुख्ता सुधार के आनन-फानन में दोबारा 35 बेड के संचालन की अनुमति जारी कर दी गई है। इस निर्णय से स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में भारी रोष व्याप्त है।

1. सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी:
उक्त अस्पताल मूलतः एक रेस्टोरेंट संचालन हेतु निर्मित भवन में बिना उचित व्यावसायिक परिवर्तन के चलाया जा रहा है। अस्पताल के ठीक बगल में अमोनिया गैस आधारित बर्फ का कारखाना (आइस फैक्ट्री) संचालित है, जिससे कभी भी गैस रिसाव जैसी जनघाती दुर्घटना घटित हो सकती है। इसके अतिरिक्त अस्पताल भवन के पास फायर सेफ्टी (Fire NOC), इमरजेंसी एग्जिट (Fire Exit) और पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था का पूरी तरह अभाव है।

2. आयुष्मान योजना में बड़ा घोटाला एवं अन-ट्रेंड स्टाफ:
पूर्व जांच में यह बात सामने आई थी कि 50 बेड की अनुमति वाले इस अस्पताल में 100 से अधिक मरीजों को भर्ती दिखाकर आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जी बिलिंग का खेल खेला जा रहा था। नामी डॉक्टरों के बोर्ड और पोस्टर लगाकर दूर-दराज के ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों से मरीजों को लाया जाता था और अन-ट्रेंड (अप्रशिक्षित) कर्मचारियों के भरोसे इलाज के नाम पर धोखाधड़ी की जाती थी।

3. स्वास्थ्य विभाग और प्रबंधन के बीच साठगांठ की आशंका:
अस्पताल सील होने के बाद, बिना किसी बुनियादी भौतिक बदलाव (Physical Verification) और सुरक्षा मानकों की पूर्ति के, स्वास्थ्य विभाग (सीएमएचओ कार्यालय) द्वारा रातों-रात 35 बेड की अनुमति जारी कर देना गंभीर भ्रष्टाचार, लेनदेन और प्रशासनिक सांठगांठ की ओर इशारा करता है।

हमारी प्रमुख मांगें:
1. परमिशन तत्काल निरस्त हो: गुड हॉस्पिटल को दी गई पुनः संचालन की अनुमति को तुरंत प्रभाव से रद्द कर अस्पताल को स्थायी रूप से सील (Permanent Close) किया जाए।

2. निष्पक्ष एस.आई.टी. (SIT) जांच: आयुष्मान भारत योजना के तहत किए गए फर्जी दावों और कागजी मरीजों के नाम पर निकाले गए पैसों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

3. अधिकारियों पर आपराधिक मामला: नियमों को ताक पर रखकर दोबारा एनओसी देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और अस्पताल संचालकों पर आपराधिक मामला (FIR) दर्ज किया जाए।

शिकायतकर्ता ठाकुर प्रियांक सिंह ने कहा यदि प्रशासन ने जन-सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले इस निर्णय को वापस नहीं लिया और भ्रष्टाचार में लिप्त दोषियों पर कड़ा कदम नहीं उठाया, तो समस्त नागरिक एवं जनसंगठन मिलकर सड़क से लेकर न्यायालय तक लड़ाई जारी रखेंगे।

Regards,
ठाकुर प्रियांक सिंह
अध्यक्ष, बुरहानपुर मज़दूर यूनियन
बुरहानपुर (मध्य प्रदेश)
ThakurPriyankSingh@gmail.com
8951305003

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