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अशोकनगर में रेलवे का किला बंदी चेक चारों तरफ से घेरा स्टेशन, 6 प्रमुख ट्रेनों में ताबड़तोड़ कार्रवाई….

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खबरवाणी

अशोकनगर में रेलवे का किला बंदी चेक चारों तरफ से घेरा स्टेशन, 6 प्रमुख ट्रेनों में ताबड़तोड़ कार्रवाई….

अशोकनगर। भारतीय रेलवे द्वारा बिना टिकट यात्रा और ट्रेनों में हो रही अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए एक विशेष जागरूकता सह जांच अभियान ‘किलाबंदी चेक’ चलाया गया। भोपाल मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के निर्देशन तथा एन के जाटव के नेतृत्व में अशोकनगर स्टेशन पर यह सघन चेकिंग अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।किलाबंदी चेक रेलवे की एक विशेष रणनीति है। इसके तहत किसी भी लक्षित रेलवे स्टेशन या ट्रेन को चारों तरफ से घेरकर यात्रियों के टिकटों की शत-प्रतिशत जांच की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य बिना टिकट यात्रा करने वालों पर रोक लगाना, आरक्षित श्रेणियों में अनधिकृत यात्रियों के प्रवेश को रोकना और आमजन को हमेशा वैध टिकट के साथ यात्रा करने के लिए जागरूक करना है। इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 7 से 10 टीटीई की विशेष टीम तैनात की गई थी। एन के जाटव के साथ टीम में गुना से 2 टीटीई और अशोकनगर से 1 टीटीई सहित अन्य 7-8 चेकिंग कर्मचारी शामिल रहे। टीम ने स्टेशन के प्रवेश-निकास द्वारों और प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेनों की घेराबंदी कर गहन जांच की।

कार्रवाई के दौरान स्टेशन से गुजरने वाली 6 प्रमुख ट्रेनों में सघन टिकट चेकिंग की गई जिनमें प्रमुख रूप से बीना-नागदा पैसेंजर, दरभंगा-अहमदाबाद साबरमती एक्सप्रेस, रुठियाई-बीना मेमू, तिरुचिरापल्ली हमसफर एक्सप्रेस ,भोपाल-ग्वालियर इंटरसिटी एक्सप्रेसऔर अहमदाबाद-दरभंगा साबरमती एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल थी इस चेकिंग के दौरान कुल 66 यात्री बिना टिकट अथवा अपनी श्रेणी से अलग यात्रा करते हुए पकड़े गए। मौके पर ही नियमविरुद्ध यात्रा कर रहे यात्रियों से कुल 47,910 रुपये का जुर्माना और रेलवे राजस्व वसूल किया गया।

अशोकनगर स्टेशन पर इस स्तर का ‘किलाबंदी चेक’ पहली बार आयोजित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, बीना, गंजबासोदा, ब्यावरा, रानी कमलापति, इटारसी और भोपाल जैसे बड़े स्टेशनों पर यह अभियान हर महीने चलाया जाता है। अब अशोकनगर में भी यह कार्रवाई हर महीने नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई उन रेल खंडों में विशेष रूप से की जाती है जहाँ से बिना टिकट यात्रा की शिकायतें ज्यादा मिलती हैं या फिर जहाँ गाड़ियाँ तो भरी रहती हैं लेकिन टिकट बिक्री का राजस्व कम आता है। ‘रेल वन ऐप’ जैसे डिजिटल माध्यमों से ऑनलाइन टिकट बुकिंग के प्रचार-प्रसार के बाद यात्रियों में जागरूकता बढ़ी है। इस तरह के अभियानों से जनता सही श्रेणी के कोच में यात्रा करने के प्रति अनुशासित होती है।

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