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नियमों को ताक पर रखकर चल रहे निजी स्कूल, शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की संलिप्तता पर उठे सवाल…..

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खबरवाणी

नियमों को ताक पर रखकर चल रहे निजी स्कूल, शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की संलिप्तता पर उठे सवाल…..

भौतिक सत्यापन और मान्यता नवीनीकरण पर उठते प्रश्न डीपीसी राहुल शर्मा से सख्त कार्रवाई की अपेक्षा…..

अशोकनगर। शिक्षा विभाग द्वारा निजी शिक्षण संस्थानों के संचालन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश तय किए गए हैं, लेकिन जिला मुख्यालय अशोकनगर में प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखकर निजी स्कूलों का खुलेआम संचालन किया जा रहा है। तुलसी कॉलोनी वार्ड क्रमांक 21 में स्थित ब्राइट बिगनिंग स्कूल और पंजाबी कॉलोनी वार्ड क्रमांक 22 में संचालित लॉर्ड कृष्णा स्कूल इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। दोनों ही शिक्षण संस्थान शिक्षा का अधिकार अधिनियम और मान्यता संबंधी प्राथमिक मापदंडों की धज्जियां उड़ाते हुए आवासीय मकानों के भीतर चलाए जा रहे हैं। सबसे गंभीर विषय यह है कि इनमें से एक स्कूल के संचालन में जिला शिक्षा केंद्र में ही पदस्थ कर्मचारी के परिजनों का नाम सामने आ रहा है, जिसके कारण विभागीय कार्रवाई और निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।

शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के शारीरिक विकास हेतु पर्याप्त खेल का मैदान होना अनिवार्य है। इसके अलावा, अग्नि सुरक्षा हवादार कक्षाएं, और आपातकालीन निकास जैसी प्राथमिक सुविधाएं होना अति आवश्यक है।
तुलसी कॉलोनी और पंजाबी कॉलोनी की तंग गलियों में चल रहे इन स्कूलों की धरातलीय स्थिति चिंताजनक है दोनों ही परिसरों के पास बच्चों के खेलने-कूदने के लिए कोई खेल मैदान उपलब्ध नहीं है। स्कूल का संचालन साधारण आवासीय मकान के कमरों में किया जा रहा है। यह विद्यालय जिन गलियों में स्थित हैं, वहां से दो पहिया और चार पहिया वाहनों का लगातार आवागमन रहता है। छुट्टी के समय बच्चों की भीड़ सड़क पर आती है, जिससे गंभीर दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। मकानों में आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने का एक ही संकरा रास्ता होता है। यदि कोई अप्रिय घटना घटती है, तो इसका सीधा जिम्मेदार कौन होगा।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आता है जब एक स्कूल के तार जिला शिक्षा केंद्र के ही जिम्मेदार कर्मचारी से जुड़ते हैं। कथित तौर पर आरोप है कि इस स्कूल का संचालन विभागीय कर्मचारी द्वारा अपने पुत्र-पुत्री के नाम पर किया जा रहा है। जब शिक्षा व्यवस्था की देखरेख करने वाले और नियमों का पालन करवाने वाले अधिकारी व कर्मचारी स्वयं व्यावसायिक लाभ के लिए नियमों का उल्लंघन करने लगें, तो निष्पक्ष जांच की उम्मीद धूमिल होने लगती है। यही कारण है कि स्थानीय नागरिक और अभिभावक लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर विभागीय अमला अपने ही साथियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने से क्यों कतराता रहा है। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों की मान्यता नवीनीकरण के दौरान भौतिक सत्यापन का प्रावधान है। नियम यह कहते हैं कि जब तक भवन की उपयोगिता, अग्निशमन एनओसी और खेल मैदान का भौतिक निरीक्षण न हो जाए, तब तक मान्यता जारी नहीं की जा सकती। ऐसे में सवाल उठता है कि इन स्कूलों को मान्यता का नवीनीकरण किस आधार पर दिया गया, क्या भौतिक सत्यापन करने वाली टीम ने बिना मौके पर पहुंचे ही फर्जी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी, क्या जिम्मेदार अधिकारियों को आवासीय भवनों में चल रहे इन सेंटरों की जानकारी नहीं थी।

शिक्षा विभाग की व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जिला स्तर पर पारदर्शी माहौल बनाने की जिम्मेदारी DPC राहुल शर्मा पर है। क्या डीपीसी महोदय अपने ही विभाग के कर्मचारियों की मनमानी पर लगाम लगा पाएंगे क्या नियमों की अनदेखी करने वाले ब्राइट बिगनिंग स्कूल और लॉर्ड कृष्णा स्कूल के खिलाफ कोई ठोस जांच कमेटी गठित की जाएगी क्या कागजों पर फर्जी दस्तावेज जमा करने वाले संचालकों की मान्यता रद्द होगी यदि जिला प्रशासन और जिला शिक्षा केंद्र इस मामले को ठंडे बस्ते में डालता है, तो इससे न केवल विभाग की साख गिरेगी बल्कि हजारों बच्चों की सुरक्षा और भविष्य के साथ भी खिलवाड़ जारी रहेगा। क्षेत्र के नागरिकों ने मांग की है कि दोनों परिसरों की निष्पक्ष जांच कर अवैध रूप से संचालित कक्षाओं को तत्काल बंद कराया जाए और दोषी कर्मचारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।

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