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आमला सिविल अस्पताल बना ‘रेफरल सेंटर’, आईसीयू और वेंटिलेटर धूल फांक रहे; जिम्मेदार मौन।
आमला ।मध्य प्रदेश के आमला स्थित सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इन दिनों पूरी तरह से वेंटिलेटर पर हैं। अस्पताल में शासन की ओर से करोड़ों रुपए की लागत से अत्याधुनिक आईसीयू (ICU) यूनिट, वेंटिलेटर और जरूरी उपकरण उपलब्ध करा दिए गए हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते ये मशीनें सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं। गंभीर मरीजों को समय पर इलाज न मिलने से अस्पताल अब इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि केवल ‘रेफरल सेंटर’ बनकर रह गया है, जहां से मरीजों को जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों के लिए टरका दिया जाता है।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से जनता में आक्रोश।
आमला और आसपास के सैंकड़ों ग्रामीण इलाकों के मरीजों के लिए आपातकालीन स्थिति में यह अस्पताल किसी काम का नहीं साबित हो रहा है। सड़क दुर्घटनाओं, हृदयघात (हार्ट अटैक) या अन्य गंभीर मामलों में जब मरीजों को तुरंत आईसीयू या लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जरूरत होती है, तो उन्हें यहां से बैतूल या अन्य शहरों के लिए रेफर कर दिया जाता है। समय पर इलाज और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ने को मजबूर हैं। आम जनता का आरोप है कि हर चुनाव में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
महापुरुषों के अपमान और अतिक्रमण पर भी फूटा गुस्सा।
स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा शहर में प्रशासनिक लापरवाही का एक और बड़ा मामला सामने आया है। शहर के मुख्य हृदय स्थल जनपद चौक पर स्वामी विवेकानंद की भव्य प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से कागजों में अटका हुआ है। आरोप है कि प्रशासनिक ढिलाई और विभागीय मिलीभगत के चलते प्रस्तावित प्रतिमा स्थल की भूमि पर खुलेआम अतिक्रमण कर कब्जा किया जा रहा है।
समाज सेवी अधिवक्ताओं ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी।
व्यवस्थाओं के इस लचर रवैये से आहत होकर क्षेत्र के अधिवक्ताओं और स्थानीय नागरिकों व सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है। सीनियर अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय, के नेतृत्व में अधिवक्ता सतीश देशमुख और रवि देशमुख एवं अन्य समाज सेवी अधिवक्तागण के नेतृत्व में वकीलों के एक शिष्टमंडल ने नर्मदापुरम कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर तीखा विरोध दर्ज कराया है।
अधिवक्ताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति कर आईसीयू यूनिट शुरू नहीं की गई और जनपद चौक को अतिक्रमण मुक्त कर स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा स्थापित नहीं की गई, तो क्षेत्र की जनता और वकीलों के द्वारा बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।





