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सरकारी दावों की खुली पोल: खाद वितरण में भारी गड़बड़ी और कालाबाजारी से अन्नदाता परेशान, सोयाबीन की बुआई पर मंडराया संकट।
आमला, क्षेत्र में खेती किसानी का मुख्य समय नजदीक आते ही खाद वितरण प्रणाली की पोल खुलती नजर आ रही है। सरकार के तमाम बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि किसानों को यूरिया और डीएपी खाद के लिए भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सहकारी समितियों और निजी दुकानों पर खाद उपलब्ध न होने के कारण किसानों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।
कालाबाजारी और मनमाने दामों पर बिक रहा खाद
किसानों का आरोप है कि खाद की कमी का फायदा उठाकर बाजार में जमकर कालाबाजारी की जा रही है। मजबूरन किसानों को मनमाने दामों पर खाद खरीदने के लिए विवश होना पड़ रहा है। हर साल बुआई के वक्त किसानों को लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद समय पर खाद नहीं मिल पा रहा है। इस लचर वितरण व्यवस्था के चलते मक्का , धान खरीप की मुख्य फसल की बुआई समय पर न होने की आशंका गहरा गई है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
वरिष्ठ कृषि अधिकारी को सौंपा ज्ञापन।
व्यवस्था की इस नाकामी और खाद की किल्लत से त्रस्त किसानों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके पश्चात उन्होंने वरिष्ठ कृषि अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई हैं।
तुरंत प्रभाव से क्षेत्र में खाद की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
खाद की कालाबाजारी करने वालों पर सख्त रोक लगाई जाए।
सहकारी समितियों के माध्यम से खाद का पारदर्शी वितरण किया जाए ताकि हर किसान को लाभ मिल सके।
अधिकारियों का आश्वासन
प्रदर्शन कर रहे किसानों से ज्ञापन लेने के बाद वरिष्ठ कृषि अधिकारी ने उन्हें आश्वस्त किया है कि खाद की समस्या को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और जल्द से जल्द इसका समाधान करवाकर राहत प्रदान की जाएगी।




