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नागपंचमी पर खेतो में बंद रहा काम, राजमिस्त्री,कारपेंटर सहित छोटे मोटे काम भी रहे बंद 

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खबरवाणी

परम्परा

नागपंचमी पर खेतो में बंद रहा काम, राजमिस्त्री,कारपेंटर सहित छोटे मोटे काम भी रहे बंद 

 

नाग मंदिरों में पूजा करने के लिए उमडी भीड

 

मुलताई । नाग पंचमी के अवसर पर नगर सहित ग्रामों में स्थित नाग मंदिरों में पुजा करने के लिए श्रृद्वालुओं की भीड उमडी । श्रृद्वालुओं द्वारा नाग मंदिर पहुचकर नागदेव की पुजा अर्चना कर आटे के दीपक लगाकर नाग देव का दुध से अभिषेक किया । इस दौरान नगर के नेहरू वार्ड में स्थित नागदेव मंदिर में बडी संख्या में श्रृद्वालुओं ने पहुचकर पुजा अर्चना की । वहीं नगर में बैतूल रोड पर स्थित नाग मंदिर, रेल्वे स्टेशन मार्ग पर स्थित नाग मंदिर एवं गांव गांव में स्थित नाग मंदिरों में पुजा करने के लिए श्रृद्वालुओं की भीड रही ।

 

खेतो में नही हुआ काम , राज

मिस्त्री एवं कारपेंटरों के भी बंद रहे काम

 

नागपंचमी पर यह परम्परा कई वर्षो से चली आ रही है कि नाग पंचमी के अवसर पर नगर सहित गांव में अधिकाशं कार्य बंद रहे है । खेतो में किसानों एवं मजदूरों द्वारा किसी प्रकार कोई कार्य नही किया जाता है । यहां तक निदांई गुडाई का कार्य भी बंद रहता है । वहीं राजमिस्त्री, कारपेंटर सहित छोटे मोटे कार्य करने वाले सभी मजदूर वर्ग भी अपने कार्य बंद रखते है । लोगों का मानना है कि नागदेवता का वास जमीन में होता है जिसके कारण खेतो एवं निर्माण संबधित कार्य नही किया जाना चाहिए । यदि जमीन संबधित कार्य किया जाएगा तो नागदेवता क्रोधित हो जाएगें । इस कारण नागपंचमी के अवसर पर सभी कार्यो को बंद कर त्यौहार मनाया जाता है। नागपंचमी के दिन कई कार्यों की मनाही होती हैं। किवंदती है कि ब्रम्हाजी ने सर्पों को नाग पंचमी के दिन पूजे जाने का वरदान दिया था। कहा जाता है कि नाग देवता की पूजा करने से राहु-केतु जनित दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा इस दिन कई कार्य वर्जित मानें जाते हैं। जिसमें किसी भी काम के लिए जमीन की खुदाई न करें। इस दिन सिलाई, कढ़ाई नहीं करनी चहिए, क्योंकि नाग पंचमी पर नुकीली और धारदार चीजों जैसे चाकू, सूई का इस्तेमाल अशुभ माना जाता है

 

घरो में चुल्हो पर नही चढता है तवा,नही बनती रोटियां

 

नागपंचमी के अवसर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नागपंचमी के दिन घर के चूल्हे पर तवा चढ़ाया नहीं जाता हैं इस दिन रोटी भी नहीं बनाई जाती है। कहते हैं कि, रोटी बनाने के लिए जिस लोहे के जिस तवे का इस्तेमाल किया जाता है उसे नाग का फन माना जाता है। तवे को नाग के फन का प्रतिरूप माना गया है. इसलिए नागपंचमी के दिन आग पर तवा नहीं रखा जाता है। इस दिन रोटी के अलावा चावल भी बनाना वर्जित ही माना जाता हैं कहते हैं चावल का संबंध नाग देवता के दांतों से होता है।।नागपंचमी के दिन चुल्हो पर तवा चढ़ाना वर्जित है।इसलिए घरो में रोटी के स्थान पर पुडी बनाई जाती है।

 

खेतो में होती है पुजा अर्चना

 

नागपंचमी के अवसर में भुमि पर नागदेवता की पुजा की जाती है । जिसमें खेतो में पुजा अर्चना कर कढाई में हलवा बनाया जाता है। जिसे कढाई कहा जाता है जिसमें रवे का हलवा बनाया जाता है। जिसका भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया जाता है । माना जाता है कि खेतो में नागपंचमी के अवसर पर पुजा अर्चना करने से साल भर खेतो में निवास करने वाले नागदेवता खेतो के मालिक एवं मजदूरो को नुकसान नही पहुचाते है तथा अच्छी फसल प्राप्त करने में मदद करते है।

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