खबरवाणी
विश्व आदिवासी दिवस 2026: संस्कृति, अधिकारों और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा का संकल्प।
आज 9 अगस्त को पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत और हमारे स्थानीय आमला में भी ‘विश्व आदिवासी दिवस’ अत्यंत उत्साह, गरिमा और परंपरा के साथ मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1994 से हर साल 9 अगस्त को इस दिवस को मनाने की घोषणा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके सांस्कृतिक योगदान को सम्मान देना है।
जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश
आदिवासी समाज की संस्कृति हमेशा से प्रकृति के साथ समन्वय बिठाकर जीने की रही है। इस वर्ष के आयोजनों का मुख्य केंद्र बिंदु ‘जल, जंगल और जमीन’ के प्राकृतिक अधिकारों की सुरक्षा रहा है। स्थानीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि आदिवासी संस्कृति पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा उदाहरण है। पेड़-पौधों, नदियों और पहाड़ों को अपने परिवार की तरह मानने वाली यह जीवनशैली आज के दौर में जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक समस्याओं से निपटने के लिए मार्गदर्शक साबित हो रही है।
पारंपरिक नृत्यों और वेशभूषा से सजे आयोजन
दिवस के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में भव्य रैलियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और गोष्ठियों का आयोजन किया गया है।
लोक कला की गूंज
युवाओं और बुजुर्गों ने पारंपरिक लोक नृत्यों जैसे कर्मा, भगोरिया, और गुदुम बाजा की प्रस्तुति देकर अपनी समृद्ध विरासत का प्रदर्शन किया।
पारंपरिक वेशभूषा
समाज के लोगों ने अपनी पारंपरिक पोशाक और आभूषणों में शिरकत कर अपनी अनूठी पहचान और इतिहास को जीवंत किया।
सम्मान समारोह: समाज के उत्थान, शिक्षा, और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले विशिष्ट व्यक्तियों और मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास पर जोर
विभिन्न विचार गोष्ठियों में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि आधुनिक युग में आदिवासी समाज का विकास तभी संभव है जब युवा पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें। साथ ही, पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर स्वरोजगार और आगे बढ़ने के नए अवसर तलाशने पर भी चर्चा हुई।
आज के इस पावन पर्व पर सभी ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करने, संविधान प्रदत्त प्रावधानों को लागू करवाने और अपनी मातृभाषा व संस्कृति को भावी पीढ़ी तक संजोकर रखने का संकल्प लिया।





