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तारा पंचायत में विकास नहीं, अनियमितताओं का पुल? 14.85 लाख की पुलिया निर्माण पर गंभीर सवाल
20% कमीशन लेकर ठेकेदार अमित पटेल से काम कराने का ग्रामीणों का दावा, घटिया निर्माण और इंजीनियरों की निगरानी पर उठे सवाल; निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग
शाहपुर। जनपद पंचायत शाहपुर की ग्राम पंचायत तारा में राज्य वित्त आयोग जनपद पंचायत स्तर से लगभग 14.85 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत बट्टी नाला पेयजल कूप के पास निर्माणाधीन कल्वर्ट पुलिया अब ग्रामीणों के आरोपों के चलते विवादों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं, गुणवत्ता से समझौता और विभागीय निगरानी में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण गुणवत्ता से समझौते का गंभीर उदाहरण हो सकता है।
ग्रामीणों का दावा है कि 26 जनवरी 2026 को स्वीकृत इस निर्माण कार्य को पंचायत द्वारा चिचोली के एक ठेकेदार को कथित रूप से 20 प्रतिशत कमीशन लेकर कराया जा रहा है। उनका आरोप है कि कमीशनखोरी के कारण निर्माण गुणवत्ता को दरकिनार कर कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उनके पास अपने आरोपों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
ग्रामीणों के अनुसार पुलिया निर्माण में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि कंक्रीट में सीमेंट, गिट्टी और अन्य सामग्री का अनुपात निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं रखा गया, जिसके कारण निर्माण के दौरान ही कई स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं। इससे पुलिया की मजबूती और उसकी दीर्घकालिक गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोप यह भी हैं कि पुलिया के दोनों ओर किए गए एप्रोच भराव में आवश्यक कम्पेक्शन नहीं किया गया। बारिश शुरू होते ही मिट्टी धंसने लगी है और पुलिया के किनारे बैठने की स्थिति बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में यह निर्माण क्षतिग्रस्त हो सकता है और लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।
निर्माण में उपयोग किए गए सरिए की गुणवत्ता और मोटाई पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वीकृत डिजाइन और तकनीकी मानकों के अनुरूप सरिया का उपयोग नहीं किया गया तथा अपेक्षाकृत पतली सरिया लगाकर निर्माण किया जा रहा है, जिससे पुलिया की मजबूती प्रभावित होने की आशंका है।
ग्रामीणों ने विभागीय इंजीनियरों और जनपद पंचायत के मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान नियमित तकनीकी निरीक्षण नहीं किए गए, जिससे कथित रूप से ठेकेदार को मनमानी करने का अवसर मिला। उनका आरोप है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी समय-समय पर मौके का निरीक्षण करते और गुणवत्ता की जांच करते तो ऐसी शिकायतें सामने नहीं आतीं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पुलिया निर्माण की स्वतंत्र तकनीकी जांच, निर्माण सामग्री की लैब टेस्टिंग तथा मापन पुस्तिका (एमबी), भुगतान अभिलेख और स्वीकृत डिजाइन की जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पंचायत पदाधिकारियों, विभागीय इंजीनियरों, जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।





