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तारा पंचायत में लाखों की नाली निर्माण में भ्रष्टाचार की बू, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
विभागीय इंजीनियरों और अधिकारियों की मॉनिटरिंग भी कटघरे में, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
शाहपुर। जनपद पंचायत शाहपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत तारा में विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में स्वीकृत निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता की अनदेखी की जा रही है। वहीं इन कार्यों की निगरानी के लिए जिम्मेदार विभागीय इंजीनियरों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सरपंच-सचिव शासन के निर्धारित मापदंडों और तकनीकी नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से निर्माण कार्य करा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में वर्षों पहले स्वीकृत कई निर्माण कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं, जबकि अनेक कार्यों की शुरुआत तक नहीं हो सकी है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विभाग द्वारा स्वीकृत कार्यों को पूरा करने की कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है, अथवा जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता और संरक्षण के कारण पंचायत में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि नवंबर 2025 में लगभग 3.91 लाख रुपये की लागत से नाली निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ था। निर्धारित समय-सीमा में कार्य शुरू नहीं होने पर ग्रामीणों ने विरोध जताया, जिसके बाद पंचायत ने जल्दबाजी में निर्माण कार्य प्रारंभ कराया। लेकिन निर्माण शुरू होते ही उसकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आने लगीं।
प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों का आरोप है कि नाली निर्माण में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। बताया गया कि नाली की दोनों दीवारों में केवल दो-दो सरियों का उपयोग किया जा रहा है, जिनमें कहीं 6 मिमी तो कहीं 8 मिमी की सरिया लगाई गई है। वहीं नाली के बेस में भी केवल दो सरियों की एकल परत बिछाकर सीधे कंक्रीट की ढलाई की जा रही है। इसके अलावा कंक्रीट मिश्रण में भी आवश्यक गुणवत्ता नहीं रखी जा रही तथा रेत के स्थान पर अधिक मात्रा में मोटी बजरी का उपयोग किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत में निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। उनका कहना है कि जिन विभागीय इंजीनियरों और अधिकारियों पर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी है, वे प्रभावी निरीक्षण करने के बजाय केवल औपचारिकता निभा रहे हैं। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और सरकारी धन का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच करवाने तथा दोषी पाए जाने वाले पंचायत पदाधिकारियों, संबंधित अधिकारियों और निर्माण कार्य से जुड़े जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है।





