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हिंसक बंदरों के आतंक से त्रस्त ग्रामीणों ने बुलाई महापंचायत
एक हजार से अधिक बंदरों के झुंड से दहशत, कई लोग हो चुके हैं घायल; स्थायी समाधान की मांग तेज
भौंरा। क्षेत्र में हिंसक बंदरों का बढ़ता आतंक अब ग्रामीणों के लिए गंभीर संकट बन गया है। गांव में सक्रिय बंदरों के बड़े झुंड ने लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल कर दिया है। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है और अब समस्या के स्थायी समाधान के लिए ग्रामीणों ने महापंचायत बुलाने का निर्णय लिया है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव और आसपास के क्षेत्र में लगभग एक हजार से अधिक बंदरों का झुंड सक्रिय है, जो आए दिन लोगों पर हमला कर रहा है। बंदरों के हमलों में अशोक सिरोटीया, कमला बाई, अर्जुन मालवीय और शिक्षक रघुनाथ मानकर सहित कई ग्रामीण घायल हो चुके हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में विशेष रूप से दहशत का माहौल है। खेतों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों की मौजूदगी के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने 21 जून को सुबह 10 बजे रामलीला चौक स्थित शिव मंदिर प्रांगण में आपातकालीन महापंचायत आयोजित करने का आह्वान किया है। बैठक में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और समाज के प्रबुद्धजन एकत्र होकर समस्या के समाधान के लिए रणनीति तैयार करेंगे।
नगर के अशोक सिरोटिया ने कहा, बंदरों का आतंक अब असहनीय हो चुका है। आए दिन लोग घायल हो रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह केवल वन्यजीव प्रबंधन का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लेकर प्रशासन और वन विभाग के समक्ष प्रभावी मांग रखी जाएगी। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए भी मजबूर होना पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से बनी यह समस्या अब विकराल रूप ले चुकी है। ऐसे में वन विभाग और प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर बंदरों के झुंड को आबादी क्षेत्र से दूर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने तथा ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। महापंचायत में इसी दिशा में आगे की रणनीति तय किए जाने की संभावना है।





