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जिस मनुष्य में दया नही वह धार्मिक नही हो सकता – देवकी नंदन ठाकुर
मुलताई। पवित्र नगरी मुलताई में मेला ग्राउंड पर चल रही श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक देवजी नंदन ठाकुर ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाई। इसके पहले उन्होने मनुष्य के धार्मिक होने पर कथा सुनाते हुए कहा कि नारद पुराण में कहा है कि आपका,कर्म,व्यवहार आचरण ही आपको को धार्मिक सिद्ध करेंगा, आपके कर्मो से ही सिद्ध होगा की आप धार्मिक है या नही। पुराणों के अनुसार मनुष्य को कर्म करना चहिए,भगवान की कथा सुनना, कीर्तन भजन करना ही नवदा भक्ति है। जिसे प्रथम भक्ति कहा गया है। भक्ति करने वाले पर hi भगवान कृपा करते है, जब भगवान की कृपा हो तो वे दो चीज देते है, प्रथम मनुष्य का शरीर एवं भगवान की कथा तब आपके पास जितने संसाधन हो उससे धर्म को आगे बढ़ाते रहो, जो भी आपके पास है, उससे कल्याण करते रहना चाहिए। गीता का ज्ञान है कि मरने से पहले अपने आप को मुक्त कर दो, मरने से पहले अपनी सरी इच्छाओ को मार दो। सब बच्चों के हवाले कर दो,संसार में अब कुछ मेरा नही वाली सोच आ जाए तो समझ लेना वहीं तुम्हारी मुक्ति है। इस दौरान उन्होंने राजा भरत का उदाहरण देते हुए कहानी सुनाई की गति के समय जिसकी जैसी मति होती है, अगले जन्म में वैसी ही योनि मिलती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक बनने के लिए दया होनी चाहिए, जिस मनुष्य में दया नही, वह धार्मिक नही हो सकता है, लेकिन धर्म और देश की रक्षा के लिए हिंसक होना पड़े तो हिंसक होना पड़ेगा, यही धर्म है। धर्म और देश के लिए क्रोध ना आए तो अपने आप को कायर समझो।





