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प्ररोहण 2026…… आमला न्याय मंदिर से गूँजा हरियाली का शंखनाद, हरा-भरा न्यायालय परिसर बनेगा नजीर
आमला। अधिवक्ता संघ और पार्षद की अनूठी पहल, केवल पौधा लगाना ही नहीं, उसके संरक्षण का भी लिया संकल्प
आमला। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आज आमला न्याय मंदिर एक ऐतिहासिक गवाह बना। अवसर था ‘प्ररोहण 2026’ अभियान के शुभारंभ का, जहाँ अधिवक्ताओं और जन प्रतिनिधियों ने मिलकर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पौधारोपण किया। दोपहर 2:00 बजे आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि सरकारी परिसर हरे-भरे होंगे, तो वे समाज के अन्य संस्थानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेंगे।
हरित आमला, हरित प्रदेश मील का पत्थर साबित होगा यह प्रयास
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वार्ड क्रमांक 5 के पार्षद राकेश शर्मा ने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि “प्ररोहण 2026” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हरित आमला, हरित प्रदेश” की परिकल्पना को साकार करने में न्यायालय परिसर में किया गया यह पौधारोपण एक मील का पत्थर साबित होगा। शर्मा ने आह्वान किया कि अन्य शासकीय कार्यालयों को भी इस मॉडल को अपनाना चाहिए ताकि आने वाली गर्मियों में शहर का तापमान संतुलित रह सके।
औपचारिकता से दूर, पेड़ पौधे के ‘पालन-पोषण’ पर जोर
अधिवक्ता संघ आमला के उपाध्यक्ष रविशंकर पटवारी ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग फोटो खिंचवाने के लिए पौधारोपण करते हैं और फिर भूल जाते हैं। पटवारी ने वकीलों को संकल्प दिलाते हुए कहा, “पौधे धरती का श्रृंगार हैं। हमें इसे केवल भूमि में लगाकर औपचारिकता पूरी नहीं करनी चाहिए। इनका पालन-पोषण एक संतान की तरह करें। जब ये पौधे वृक्ष बनकर पुष्प और फल देंगे, तो वह हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा उपहार होगा।”
छायादार एवं औषधि पौधों का किया गया रोपण
कार्यक्रम में बीजों का रोपण और औषधि पौधों को लगाया गया नीम पीपल बादाम आवला अशोक हरसिद्धि कनेर बेलपत्र के पौधो को स्वर्गीय तपेश कुमार दुबे द्वारा पूर्व में तैयार की गई न्याय वाटिका में लगाया गया वकील राजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि गमले में तुलसी के पौधे लगाकर वह सभी अधिवक्ता साथियों के शेड में लगाएंगे साथ ही उन्होंने न्यायालय परिसर में माली की पद स्थापना की मांग भी की पौधोंरोपन के महत्व को बताते हुए कहा कि यह कार्य हमें करना ही है शास्त्रों में प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियां का निर्वहन करने का कहा गया है रवि देशमुख मधुकर महाजन दिनेश सोनी शबाना खान किरण जैसवाल यशपाल ठाकुर सुरेंद्र खातरकर कल्पेश माथनकर सहित अधिवक्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे





