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ट्रैक्टर वापस न करने और अवैध वसूली का आरोप, आदिवासी युवक ने की आदिम जाति कल्याण विभाग से शिकायत।
आमला, क्षेत्र के ग्राम रेंगाढाना निवासी एक आदिवासी युवक ने एक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाते हुए आदिम जाति कल्याण विभाग से न्याय की गुहार लगाई है। आवेदक का आरोप है कि मूल रकम और भारी-भरकम ब्याज चुकाने के बाद भी अनावेदक उसका ट्रैक्टर वापस नहीं कर रहा है और जान से मारने की धमकी दे रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम रेंगाढाना (आमला) निवासी गणपत उइके पिता मिकू उइके ने बैतूल आदिम जाति कल्याण विभाग के महोदय को एक लिखित आवेदन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में ग्राम रतेड़ाखुर्द निवासी नीलेश यादव पिता शिवपाल यादव को अनावेदक बनाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
आवेदक गणपत उइके ने बताया कि वर्ष 2023 में उसने अपने पिता के नाम पर एक ट्रैक्टर मॉडल वर्ष 2023 लिया था, जिसकी किस्तें चुकाने के लिए उसे पैसों की सख्त जरूरत थी। इसके लिए उसने अनावेदक नीलेश यादव से 2 प्रतिशत मासिक ब्याज की दर पर 1 लाख रुपये उधार लिए थे। इसकी लिखा-पढ़ी दिनांक 10/01/26 को की गई थी।
लाखों रुपये वसूलने के बाद भी नहीं दिया ट्रैक्टर
शिकायत के मुताबिक, आवेदक ने ब्याज सहित पूरी राशि चुकाने के लिए दिनांक 20/05/26 को 1,25,000/- रुपये नकद (लिखा-पढ़ी के साथ) अनावेदक को सौंप दिए। आरोप है कि इसके बाद भी अनावेदक ने ट्रैक्टर वापस नहीं किया और वाहन की चाबी मांगते हुए 25,000/- रुपये अतिरिक्त की मांग करने लगा। विरोध करने पर अनावेदक ने ट्रैक्टर का ऑइल तक निकाल देने और झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी।
धोखाधड़ी और डराने-धमकाने का आरोप
आवेदक का आरोप है कि अनावेदक ने उसे गुमराह कर ‘गिरवीनामा’ की जगह ‘बिक्रीनामा’ तैयार करवा लिया और अब ट्रैक्टर को खुद का बता रहा है। गणपत का कहना है कि अनावेदक उससे अब तक किराए के रूप में 80,000/- रुपये, चार माह के ब्याज के रूप में 40,000/- रुपये और मूलधन वापसी के समय 25,000/- रुपये अतिरिक्त वसूल चुका है। कुल मिलाकर 1,45,000/- रुपये की अवैध वसूली की जा चुकी है, फिर भी उसका ट्रैक्टर हड़पने की नीयत से उसे धमकी दी जा रही है।
पीड़ित आदिवासी युवक ने विभाग से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अनावेदक के खिलाफ शीघ्र उचित दंडात्मक कार्रवाई की जाए और उसका ट्रैक्टर व वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस दिलाई जाए।
यह आवेदन पत्र के दावों पर आधारित है। प्रशासन या पुलिस जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।





