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ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध मिट्टी उत्खनन का मामला, कार्रवाई नहीं होने से बढ़े सवाल
बुरहानपुर ग्रामीण क्षेत्रों में कथित अवैध मिट्टी उत्खनन का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर बिना अनुमति बड़े पैमाने पर मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है, जिससे कृषि भूमि, ग्रामीण रास्तों और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दिनों एक किसान द्वारा कथित अवैध मिट्टी उत्खनन का विरोध किए जाने पर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी। पीड़ित किसान ने आरोप लगाया था कि विरोध करने पर उसके साथ हाथापाई की गई और उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। किसान के अनुसार इस घटना में उसके सिर पर चोट आई थी, जिसके बाद उसने संबंधित विभाग और शिकायत की थी। हालांकि मामले में विभाग स्तर पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध उत्खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंच सकता है। किसान ने आरोप लगाया कि मिट्टी निकालने से खेतों की उपजाऊ परत प्रभावित हो रही है, वहीं भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कों की स्थिति भी खराब हो रही है। लोगों का कहना है कि रात दीन ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहन मिट्टी परिवहन में लगाए जाते हैं, जिससे ग्रामीणों में भय और नाराजगी का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों ने विभाग से मांग की है कि जिन स्थानों पर बिना अनुमति उत्खनन की शिकायतें मिल रही हैं, वहां संयुक्त जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि राजस्व विभाग, खनिज विभाग मिलकर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि अवैध गतिविधियों पर रोक लग सके और कानून व्यवस्था बनी रहे। ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि शिकायत करने वाले किसानों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वे बिना डर के अपनी बात विभाग तक पहुंच सकें।
कानूनी जानकारों के अनुसार बिना वैध अनुमति के मिट्टी या खनिज का उत्खनन किए जाने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे मामलों में जांच के आधार पर वाहन जब्ती, जुर्माना और अन्य वैधानिक कार्रवाई कर सकता है। हालांकि किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ आरोप सिद्ध होना जांच और खनिज विभाग प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि लगातार सामने आ रही शिकायतें गंभीर विषय हैं। उनका मानना है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए तो अवैध उत्खनन पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। वहीं किसानों ने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित निगरानी बढ़ाई जाए और जिन क्षेत्रों में अवैध उत्खनन की आशंका है वहां विशेष अभियान चलाया जाए।
फिलहाल ग्रामीणों और किसानों की नजर विभागी कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो मिट्टी माफियाओं के हौसले और बढ़ सकते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की शांति, पर्यावरण और खेती-किसानी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।






