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लिवर सिरोसिस के लक्षण: समय रहते पहचानें, वरना बढ़ सकती है परेशानी

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लिवर हमारे शरीर का बेहद अहम अंग होता है। यह शरीर से गंदगी और टॉक्सिन बाहर निकालने, खाना पचाने में मदद करने और कई जरूरी प्रोटीन बनाने का काम करता है। लेकिन जब लिवर धीरे-धीरे खराब होने लगता है, तब एक गंभीर बीमारी जन्म लेती है जिसे Liver Cirrhosis कहा जाता है। अगर समय रहते इसके संकेत पहचान लिए जाएं, तो बड़ी दिक्कतों से बचा जा सकता है। आइए आसान देसी हिंदी में समझते हैं लिवर सिरोसिस के लक्षण और इसकी पहचान।

हर वक्त थकान और शरीर में कमजोरी रहना

अगर बिना ज्यादा मेहनत किए भी शरीर टूटा-टूटा महसूस हो, हर समय आलस आए और काम करने का मन न करे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। लिवर सिरोसिस में लिवर सही तरीके से शरीर को ऊर्जा नहीं दे पाता। इसी वजह से इंसान दिनभर थका हुआ महसूस करता है। कई लोगों को सीढ़ियां चढ़ने या थोड़ा चलने में भी दम फूलने लगता है। देसी भाषा में कहें तो शरीर बिल्कुल “ढीला-ढाला” पड़ जाता है।

आंखों और त्वचा का पीला पड़ना

लिवर खराब होने का सबसे बड़ा संकेत पीलिया यानी Jaundice हो सकता है। इसमें आंखों की सफेदी पीली दिखने लगती है और त्वचा का रंग भी बदल जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लिवर शरीर से बिलीरुबिन नाम का पदार्थ बाहर नहीं निकाल पाता। कई बार पेशाब का रंग भी गहरा पीला हो जाता है। अगर ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।

हल्की चोट में भी खून बहना और नीले निशान पड़ना

जब लिवर सही तरीके से काम नहीं करता, तब शरीर में खून जमाने वाले जरूरी प्रोटीन कम बनने लगते हैं। इसका असर यह होता है कि मामूली चोट लगने पर भी ज्यादा खून बह सकता है। कई लोगों के शरीर पर बिना वजह नीले-काले निशान पड़ने लगते हैं। अगर बार-बार ऐसा हो रहा है, तो यह लिवर सिरोसिस का संकेत हो सकता है।

पेट में सूजन और दर्द की समस्या

लिवर सिरोसिस में पेट फूलना आम समस्या है। पेट में पानी भरने लगता है, जिसे डॉक्टर की भाषा में एसाइटिस कहा जाता है। इससे पेट भारी महसूस होता है और बैठने-उठने में तकलीफ होती है। कई बार हल्का दर्द या बेचैनी भी बनी रहती है। देसी अंदाज में कहें तो पेट “फूला-फूला” और तना हुआ लगता है। ऐसी हालत में घरेलू इलाज पर भरोसा करने की बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

लिवर सिरोसिस की जांच कैसे होती है?

लिवर सिरोसिस की पहचान के लिए डॉक्टर कई तरह की जांच करते हैं। इसमें ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और कभी-कभी लिवर बायोप्सी भी शामिल होती है। इन जांचों से पता चलता है कि लिवर कितना डैमेज हो चुका है। अगर बीमारी शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए, तो इलाज और सही खानपान से स्थिति को काफी हद तक संभाला जा सकता है।

लिवर सिरोसिस एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर लक्षण पहचानकर इलाज कराया जाए तो खतरे को कम किया जा सकता है। इसलिए शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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