US Oil Diplomacy: हाल ही में United Arab Emirates ने OPEC से बाहर निकलने का फैसला लेकर पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। OPEC एक ऐसा संगठन है जो तेल उत्पादन और कीमतों को कंट्रोल करता है। UAE के इस कदम के बाद अब वह खुद तय करेगा कि कितना तेल निकालेगा और किस कीमत पर बेचेगा। इससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
Donald Trump की ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ क्या है?
अमेरिका लंबे समय से मिडिल ईस्ट में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। Donald Trump की रणनीति को “ऑयल डिप्लोमेसी” कहा जा रहा है, जिसमें तेल उत्पादन, सप्लाई और कीमतों पर कंट्रोल हासिल करना शामिल है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि UAE का OPEC से बाहर निकलना इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
Strait of Hormuz और ईरान विवाद का असर
Iran के साथ बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz में रुकावट की वजह से तेल सप्लाई पर असर पड़ा है। इसी कारण कच्चे तेल की कीमतें $126 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो पिछले 4 साल में सबसे ज्यादा है। इससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का खतरा है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। ऐसे में अगर ग्लोबल मार्केट में कीमतें बढ़ती हैं तो पेट्रोल-डीजल महंगा होना तय है। UAE के OPEC से बाहर आने के बाद अगर वह ज्यादा उत्पादन करता है तो कीमतें घट सकती हैं, लेकिन अगर सप्लाई कम हुई तो भारत जैसे देशों पर सीधा असर पड़ेगा।
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कौन जीतेगा और कौन हारेगा?
इस पूरे “ऑयल गेम” में अमेरिका, UAE और सऊदी अरब जैसे देश बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। अगर अमेरिका अपनी रणनीति में सफल होता है तो OPEC की ताकत कमजोर हो सकती है। वहीं छोटे तेल उत्पादक देशों को नुकसान हो सकता है।





