ईरान संकट के चलते जब तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा, तो Bangladesh, Sri Lanka, Nepal और Maldives जैसे देशों ने भारत की ओर रुख किया। देसी भाषा में—“मुसीबत में वही याद आता है जो काम आए”।
भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ नीति का कमाल
भारत की विदेश नीति किसी एक देश या गुट तक सीमित नहीं है। India न तो पूरी तरह अमेरिका-इजरायल के साथ खड़ा दिखता है, न ही ईरान के खिलाफ। यही संतुलन पड़ोसी देशों को भरोसा देता है कि भारत हर हाल में मदद कर सकता है। “सबसे दोस्ती, किसी से दुश्मनी नहीं”—यही गेम चेंजर है।
चीन क्यों नहीं बन पाया पहली पसंद?
China भले ही अरबों का निवेश करता है, लेकिन उस पर “कर्ज जाल” (Debt Trap) के आरोप लगते रहे हैं। जरूरत के समय तुरंत तेल या गैस सप्लाई देना उसके लिए आसान नहीं होता। वहीं भारत तुरंत मदद पहुंचा रहा है—“बातों से नहीं, काम से भरोसा बनता है”।
देश-दर-देश: किसे कितनी मदद मिली
Sri Lanka को भारत ने हजारों टन पेट्रोल-डीजल भेजा। Nepal को गैस सप्लाई बढ़ाने का भरोसा मिला। Bangladesh को पाइपलाइन से डीजल दिया जा रहा है। वहीं Maldives ने भी भारत से मदद मांगी है। “हर पड़ोसी को भारत से उम्मीद”।
भारत की अपनी चुनौती भी कम नहीं
एक तरफ भारत मदद कर रहा है, दूसरी तरफ उसके अपने कई जहाज Strait of Hormuz के पास फंसे हुए हैं। फिर भी भारत सप्लाई चेन बनाए रखने में लगा है। “खुद की भी लड़ाई, और दूसरों की भी मदद”—यही असली लीडरशिप है।





