दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल Russia ने 1 अप्रैल 2026 से 31 जुलाई 2026 तक पेट्रोल एक्सपोर्ट पर अस्थायी रोक लगा दी है। इसका मकसद अपने देश में पेट्रोल की कीमतों को कंट्रोल करना और सप्लाई बनाए रखना है। देसी भाषा में कहें तो “पहले घर संभालो, फिर बाहर बेचो” वाला मामला है।
ग्लोबल मार्केट पर क्या पड़ेगा असर?
रूस के इस फैसले से इंटरनेशनल मार्केट में हलचल मच सकती है। खासकर यूरोप और एशिया के कुछ देश, जो रूस से पेट्रोल खरीदते हैं, वहां कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि एक्सपर्ट मानते हैं कि इसका असर बहुत ज्यादा नहीं होगा, क्योंकि रूस का पेट्रोल एक्सपोर्ट कुल मार्केट में बहुत बड़ा हिस्सा नहीं है।
भारत पर कितना असर पड़ेगा?
भारत की बात करें तो यहां ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं है। भारत सीधे पेट्रोल नहीं, बल्कि कच्चा तेल (crude oil) खरीदता है और खुद उसे रिफाइन करके पेट्रोल-डीजल बनाता है। यानी “हम कच्चा माल लेते हैं, फाइनल प्रोडक्ट खुद बनाते हैं”। इसलिए इस बैन का सीधा असर भारत पर कम ही पड़ेगा।
भारत के पास कितना स्टॉक है?
सरकार के मुताबिक भारत के पास करीब 60 दिन का पेट्रोलियम स्टॉक मौजूद है। साथ ही देश में 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप पर सप्लाई सामान्य तरीके से चल रही है। इसके अलावा भारत खुद भी कई देशों को पेट्रोल-डीजल एक्सपोर्ट करता है, जिससे स्थिति और मजबूत रहती है।
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क्या फिर भी बढ़ सकते हैं दाम?
हालांकि सीधे असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अगर इस फैसले से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। लेकिन फिलहाल सरकार और ऑयल कंपनियों ने भरोसा दिलाया है कि कीमतों को कंट्रोल में रखा जाएगा। देसी अंदाज में कहें तो “अभी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है”।





