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बुरहानपुर के परकोटे की दीवारें बनी विज्ञापन का केंद्र, ऐतिहासिक धरोहर की सुंदरता पर संकट

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खबरवाणी

बुरहानपुर के परकोटे की दीवारें बनी विज्ञापन का केंद्र, ऐतिहासिक धरोहर की सुंदरता पर संकट

पुरातत्व विभाग की पेंटिंग उखड़ रही, दीवारों पर लिखे जा रहे निजी विज्ञापन, संरक्षण पर उठे सवाल

बुरहानपुर। ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध शहर बुरहानपुर की परकोटे की दीवारें इन दिनों उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार होती नजर आ रही हैं। कभी शहर की पहचान और गौरव मानी जाने वाली ये दीवारें अब निजी दुकानों और व्यवसायिक विज्ञापनों का माध्यम बनती जा रही हैं। इससे न केवल ऐतिहासिक धरोहर की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि संरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले पुरातत्व विभाग द्वारा परकोटे की दीवारों पर शहर के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाली पेंटिंग और चित्र बनाए गए थे। इन चित्रों का उद्देश्य शहर की पहचान को सहेजना और पर्यटन को बढ़ावा देना था। लेकिन अब ये पेंटिंग जगह-जगह से उखड़ने लगी हैं और उनकी जगह निजी विज्ञापन, कोचिंग, दुकानों और व्यापार से जुड़े संदेश लिखे जा रहे हैं।
सुत्र से मिली जानकारी के अनुसार लोगों का कहना है कि परकोटे की दीवारों पर बिना अनुमति पेंटिंग और लेखन किया जा रहा है, जिससे ऐतिहासिक संरचना की गरिमा लगातार कम हो रही है। कई स्थानों पर दीवारों की प्लास्टरिंग भी खराब हो चुकी है, जिससे दीवारें खंडहर जैसी दिखाई देने लगी हैं।
नागरिकों के अनुसार, यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो शहर की यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे अपनी पहचान खो सकती है।

संरक्षण व्यवस्था पर सवाल
परकोटे की दीवारों की देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है, लेकिन वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि नियमित निगरानी और रखरखाव का अभाव है। शहर के विभिन्न हिस्सों में दीवारों पर अवैध रूप से पोस्टर, पेंट और विज्ञापन लिखे जा रहे हैं, लेकिन इन्हें हटाने या जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही।
इतिहास प्रेमियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि सम्बंधित विभाग और पुरातत्व विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाएं, तो इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है। साथ ही दीवारों की मरम्मत और दोबारा कलात्मक पेंटिंग कराकर शहर की ऐतिहासिक छवि को बेहतर बनाया जा सकता है।
कानून क्या कहता है?
ऐतिहासिक स्मारकों और संरक्षित धरोहरों को नुकसान पहुंचाना या उन पर बिना अनुमति लिखावट करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और संबंधित विभागों के नियमों के अनुसार संरक्षित स्मारकों की दीवारों पर पोस्टर, विज्ञापन या पेंटिंग करना प्रतिबंधित है।
Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act के तहत स्मारकों को क्षति पहुंचाने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
नगर निगम के नियमों के अनुसार भी सार्वजनिक और ऐतिहासिक स्थलों पर बिना अनुमति विज्ञापन लिखना अवैध है।
नागरिकों की मांग
स्थानीय नागरिकों ने सम्बंधित विभाग से मांग की है कि:
परकोटे की दीवारों पर लिखे गए अवैध विज्ञापनों को हटाया जाए
दीवारों की मरम्मत और पुनः पेंटिंग कराई जाए
नियमित निगरानी व्यवस्था लागू की जाए
जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई की जाए

बुरहानपुर की पहचान उसकी ऐतिहासिक विरासत से है। परकोटे की दीवारें केवल ईंट-पत्थर की संरचना नहीं, बल्कि शहर के गौरव और इतिहास की प्रतीक हैं। यदि समय रहते इनके संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह धरोहर केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित होकर रह जाएगी।

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