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झांझर फैक्ट्री में प्रदूषण की जांच: पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने लिए सैंपल, शिकायतकर्ता ने जताई आपत्ति ज्ञानेश्वर तायड़े

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खबरवाणी

झांझर फैक्ट्री में प्रदूषण की जांच: पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने लिए सैंपल, शिकायतकर्ता ने जताई आपत्ति ज्ञानेश्वर तायड़े

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बुरहानपुर। जिले के ग्राम झांझर में कथित रूप से फैक्ट्री द्वारा केमिकल युक्त पानी नाले में छोड़े जाने की शिकायत के बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची। जानकारी के अनुसार, इन्दौर से आई मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने फैक्ट्री परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा विभिन्न स्थानों से पानी के नमूने एकत्र किए।
टीम ने छह स्थानों से लिए नमूने
शिकायत के आधार पर जांच के दौरान अधिकारियों ने फैक्ट्री से निकलने वाले पानी सहित कुल छह अलग-अलग स्थानों से सैंपल लिए। इन नमूनों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पानी में किसी प्रकार के हानिकारक या मानक से अधिक रासायनिक तत्व मौजूद हैं या नहीं।
जांच टीम ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों और संबंधित पक्षों से जानकारी भी ली तथा निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की।
शिकायतकर्ता ने जांच पर उठाए सवाल
इस मामले के शिकायतकर्ता तोताराम खांडेराव भी जांच के दौरान मौके पर उपस्थित रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया संतोषजनक नहीं रही और अधिकारियों द्वारा केवल औपचारिकता पूरी की गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने पंचनामा पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया, क्योंकि उन्हें जांच की निष्पक्षता पर संदेह है। उनका आरोप है कि मामले में गंभीरता से कार्रवाई नहीं की जा रही है।
अधिकारियों का पक्ष
जांच दल के सदस्यों ने मौके पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सैंपल संग्रहित किए और आगे की कार्रवाई के लिए रवाना हो गए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यदि फैक्ट्री द्वारा प्रदूषण मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो पर्यावरण नियमों के तहत नोटिस, जुर्माना या अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
ग्रामीणों में चिंता का माहौल
फैक्ट्री से निकलने वाला पानी प्रदूषित है, तो इससे पशुओं, भूजल और आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
कानून क्या कहता है
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में उद्योगों को जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। बिना शोधन (ट्रीटमेंट) के औद्योगिक अपशिष्ट को नालों या जल स्रोतों में छोड़ना दंडनीय अपराध है।
रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
फिलहाल मामले की जांच प्रयोगशाला रिपोर्ट पर निर्भर है। और प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

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