खबरवाणी
जिले में बिना लाइसेंस ठेकेदारों की बाढ़
मजदूर बने ठेकेदार, अधूरे मकान और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी
ज्ञानेश्वर तायडे
बुरहानपुर जिले में इन दिनों भवन निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक हजारों की संख्या में मकानों का निर्माण जारी है, लेकिन इसी के साथ एक गंभीर समस्या भी सामने आ रही है। जिले में बड़ी संख्या में ऐसे लोग ठेकेदार बनकर उभर आए हैं, जिनके पास न तो किसी प्रकार का सरकारी लाइसेंस है और न ही निर्माण कार्य करने की वैधानिक अनुमति।
स्थानीय लोगों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पहले जो लोग दिहाड़ी मजदूरी किया करते थे, वही अब खुद को ठेकेदार बताकर मकान निर्माण के ठेके ले रहे हैं। कम लागत और अधिक मजदूरी के लालच में कई मकान मालिक ऐसे लोगों को काम सौंप रहे हैं, जिसका खामियाजा उन्हें अधूरे मकानों और आर्थिक नुकसान के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
अधूरे मकान, परेशान मकान मालिक
जिले के कई क्षेत्रों में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां बिना लाइसेंस ठेकेदारों ने मकान निर्माण का कार्य हाथ में तो लिया, लेकिन बीच में ही काम छोड़कर गायब हो गए।
मकान मालिकों का कहना है कि ठेकेदार शुरू में कम दरों पर काम करने का आश्वासन देते हैं, लेकिन कुछ समय बाद या तो मजदूरी बढ़ाने की मांग करते हैं या फिर बिना सूचना दिए काम अधूरा छोड़ देते हैं।
एक मकान मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,
“कम खर्च में काम पूरा हो जाएगा, ऐसा कहकर ठेका लिया गया था। आधा काम होने के बाद ठेकेदार गायब हो गया। अब न पैसा बचा है, न मकान पूरा हुआ।”
ऐसे मामलों में मकान मालिक न तो किसी ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर पा रहे हैं और न ही अपनी जमा पूंजी वापस हासिल कर पा रहे हैं।
बाहरी ठेकेदारों की भी बढ़ती संख्या
सूत्रों के अनुसार बुरहानपुर जिले में बाहरी जिलों और राज्यों से भी कई लोग खुद को ठेकेदार बताकर निर्माण कार्य ले रहे हैं। इन लोगों की न तो स्थानीय पहचान स्पष्ट होती है और न ही कोई स्थायी पता।
काम अधूरा छोड़ने के बाद ऐसे ठेकेदार आसानी से जिले से बाहर चले जाते हैं, जिससे मकान मालिक पूरी तरह असहाय रह जाते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग इन ठेकेदारों की सूची तैयार करे, तो बड़ी संख्या में फर्जी और बिना मान्यता वाले ठेकेदार सामने आ सकते हैं।
सरकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी
निर्माण कार्य से जुड़े नियमों के अनुसार, किसी भी ठेकेदार के लिए पंजीकरण, लाइसेंस और श्रम कानूनों का पालन करना अनिवार्य है।
इसके बावजूद जिले में धड़ल्ले से बिना लाइसेंस निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं।
न तो श्रमिकों का पंजीकरण हो रहा है, न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि यदि श्रम विभाग, नगर निगम और संबंधित निर्माण विभाग संयुक्त रूप से जांच अभियान चलाएं, तो स्थिति की गंभीरता साफ सामने आ सकती है।
श्रम विभाग और संबंधित अधिकारियों की चुप्पी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में संबंधित विभागों की भूमिका सवालों के घेरे में है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि श्रम विभाग और अन्य जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
अब तक न तो किसी बड़े स्तर पर जांच की गई है और न ही बिना लाइसेंस ठेकेदारों पर ठोस कार्रवाई देखने को मिली है।
यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है।
जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज
निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि
जिले में कितने ठेकेदार पंजीकृत हैं
कितने बिना लाइसेंस काम कर रहे हैं
कितने मामलों में मकान अधूरे छोड़े गए हैं
यदि इन बिंदुओं पर जांच हो, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
जनता की मांग – सख्त कार्रवाई हो
बुरहानपुर जिले की जनता और मकान मालिकों की मांग है कि बिना लाइसेंस ठेकेदारों पर तत्काल रोक लगाई जाए
निर्माण कार्य शुरू करने से पहले ठेकेदार की वैधानिक जांच अनिवार्य की जाए
दोषियों पर कानूनी कार्रवाई हो
और पीड़ित मकान मालिकों को न्याय मिले
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग कब तक इस समस्या को नजरअंदाज करते रहते हैं, या फिर समय रहते ठोस कदम उठाकर जनता को राहत देते हैं





