India European Union Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड डील को लेकर सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं कि बातचीत 2007 में शुरू होकर 2026 में जाकर क्यों पूरी हुई। मनमोहन सिंह सरकार के समय शुरू हुई यह प्रक्रिया कई राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक कारणों से बार बार अटकती रही। इन 18 सालों में नीतियां बदलीं, सरकारें बदलीं और वैश्विक हालात भी पूरी तरह बदल गए।
2007 से 2013 तक क्यों नहीं बन पाई सहमति
जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच बातचीत शुरू हुई, तब यूरोपीय देश चाहते थे कि भारत अपने बाजार को ज्यादा खोले और आयात शुल्क घटाए। वहीं भारत की चिंता अपने किसानों, डेयरी सेक्टर और छोटे उद्योगों को बचाने की थी। यूरोप सस्ते कृषि और डेयरी उत्पाद भारत में लाना चाहता था, लेकिन भारत इसके लिए तैयार नहीं था। इसी टकराव की वजह से 2013 में बातचीत पूरी तरह ठप हो गई।
नौ साल तक बातचीत क्यों रही बंद
2013 से 2022 तक लगभग नौ साल ऐसे रहे जब ट्रेड डील पर कोई ठोस बातचीत नहीं हुई। इसकी बड़ी वजह थी भारत का घरेलू हित और यूरोपीय संघ की सख्त शर्तें। यूरोप की गुणवत्ता नियम, सर्टिफिकेशन और 27 देशों की सामूहिक सहमति लेना भी एक बड़ी चुनौती थी। भारत अपने किसानों और घरेलू उद्योगों से समझौता नहीं करना चाहता था, इसलिए फैसला टलता गया।
2022 के बाद क्यों आई तेजी
2022 के बाद वैश्विक हालात बदल गए। चीन पर निर्भरता घटाने और सप्लाई चेन मजबूत करने की जरूरत दोनों पक्षों ने महसूस की। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और यूरोप की नई रणनीति ने बातचीत को रफ्तार दी। बीते तीन सालों में लगातार दौर की बैठकें हुईं और आखिरकार सहमति बन पाई। लक्ष्य रखा गया कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना किया जाए।
ट्रेड डील से भारत को क्या फायदे होंगे
इस समझौते के बाद भारत को यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ सीधा और आसान व्यापार मिलेगा। दवाइयां, आईटी, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, चमड़ा और जेम्स ज्वेलरी जैसे सेक्टर को बड़ा फायदा होगा। कई उत्पादों पर यूरोप में लगने वाला करीब 10 प्रतिशत शुल्क खत्म होगा, जिससे भारतीय सामान सस्ता और प्रतिस्पर्धी बनेगा। वहीं भारत में भी कुछ आयात सस्ते होंगे, जिससे आम लोगों को फायदा मिलेगा।
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क्यों कहा जा रहा है मदर ऑफ डील्स
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और 2024 में दोनों के बीच व्यापार 120 अरब यूरो से ज्यादा रहा। इतने बड़े स्तर की डील, जिसमें व्यापार के साथ साथ सुरक्षा और रक्षा सहयोग भी शामिल है, इसी वजह से इसे मदर ऑफ डील्स कहा जा रहा है। यह समझौता भारत को वैश्विक मंच पर और मजबूत बनाएगा।





