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SIR: वोटर लिस्ट से नाम कटना गंभीर मामला, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

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SIR: सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर बड़ा और अहम बयान दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि अगर किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं होता, तो इसके गंभीर नागरिक परिणाम हो सकते हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कोई भी शक्ति असीमित नहीं हो सकती।

एसआईआर मामले की सुनवाई में कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह टिप्पणी उस दौरान की, जब चुनाव आयोग द्वारा कई राज्यों में कराए जा रहे एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई हो रही थी। इन याचिकाओं में बिहार समेत कई राज्यों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को सवालों के घेरे में रखा गया है।

वोटर लिस्ट से नाम कटने के क्या हो सकते हैं नतीजे

मुख्य न्यायाधीश ने चिंता जताते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम बाहर होने पर व्यक्ति के नागरिक अधिकार सीधे प्रभावित होते हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21 का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब किसी प्रक्रिया से नागरिक अधिकार प्रभावित हो रहे हों, तो तय कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया जाना चाहिए।

क्या चुनाव आयोग के पास असीमित अधिकार हैं

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने भी चुनाव आयोग की शक्तियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर सभी सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने दो टूक कहा कि कोई भी शक्ति पूर्ण या निरंकुश नहीं हो सकती और हर निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे में आना चाहिए।

चुनाव आयोग की दलील क्या रही

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21 की उपधारा 3 आयोग को विशेष पुनरीक्षण का अलग और स्वतंत्र अधिकार देती है। उनके अनुसार यह शक्ति नियमित पुनरीक्षण से अलग है और आयोग को इसमें लचीलापन मिलता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि प्रक्रिया मनमानी नहीं होनी चाहिए।

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दस्तावेजों को लेकर कोर्ट की चिंता

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब फॉर्म छह में सात दस्तावेजों की जरूरत होती है, तो एसआईआर प्रक्रिया में ग्यारह दस्तावेज क्यों मांगे जा रहे हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्या चुनाव आयोग तय दस्तावेजों में मनमाने बदलाव कर सकता है। इस पर आयोग ने कहा कि प्रक्रिया को न्यायसंगत और पारदर्शी रखा गया है और संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत वयस्क मताधिकार का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

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