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World COPD Day 2025: इनहेलर चलाने में करते हैं छोटी-छोटी गलतियाँ? AIIMS भोपाल की स्टडी बताती है कैसे बढ़ रही है बीमारी

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World COPD Day 2025 के मौके पर AIIMS भोपाल की एक ताज़ा रिसर्च ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। अगर आपके घर में कोई अस्थमा या COPD का मरीज है और इनहेलर का उपयोग करता है, तो यह रिपोर्ट जरूर जानें। अध्ययन में पाया गया कि करीब 70% मरीज इनहेलर का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे दवा का पूरा फायदा शरीर को नहीं मिलता और बीमारी उल्टा बढ़ती जाती है।

गलत तरीका बना रहा बीमारी को और गंभीर

AIIMS भोपाल के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डॉ. आलकेश कुमार खुराना के नेतृत्व में की गई इस स्टडी में पता चला कि मरीज दो सबसे बड़ी गलतियाँ करते हैं। पहली—इनहेलर का दवाब वाला हिस्सा सही तरीके से उपयोग नहीं होता और दवा गले में ही जम जाती है। दूसरी—सांस लेने का तरीका इतना हल्का होता है कि दवा फेफड़ों तक पहुंच ही नहीं पाती। इससे खांसी, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं।

86% मरीज स्पेसर का उपयोग ही नहीं करते

MDI यानी मीटर्ड डोज़ इनहेलर (पंप इनहेलर) का उपयोग करने वाले 86% मरीज स्पेसर का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। स्पेसर न लगाने से दवा तेज़ी से निकलती है और सीधे गले में चिपक जाती है, जबकि इसका असली लक्ष्य फेफड़े होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार स्पेसर दवा को स्मूथली फेफड़ों तक पहुंचाता है और नुकसान कम होता है।

60% मरीज DPI इनहेलर में गहरी सांस नहीं लेते

DPI यानी ड्राई पाउडर इनहेलर चलाने वाले 60% मरीज गहरी और तेज़ सांस नहीं लेते, जबकि यह इस इनहेलर का सबसे महत्वपूर्ण स्टेप है। जब हम हल्की सांस लेते हैं, तो पाउडर सिर्फ मुंह और गले में रह जाता है। इससे दवा का असर कम हो जाता है और लक्षण बढ़ते जाते हैं।

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सिर्फ तरीका बदलने से दिखा बड़ा सुधार

स्टडी के दौरान 45 अस्थमा और 38 COPD मरीजों को चार हफ्तों तक मॉनिटर किया गया। उनकी दवाइयाँ नहीं बदली गईं—सिर्फ सही तरीका सिखाया गया। नतीजे चौंकाने वाले रहे—

  • अस्थमा मरीजों की FEV-1 फेफड़ों की क्षमता में सुधार
  • ACT स्कोर 18.0 से बढ़कर 20.75
  • COPD मरीजों में CAT स्कोर 21.86 से घटकर 19.83
  • मरीजों ने सांस लेने में हल्कापन और आराम महसूस किया

सिर्फ तरीका बदलने से दवा का असर दोगुना हो गया।

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