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बढ़ती गर्मी में ठंडे पेय की मांग चरम पर, सैकरीन व मिलावट से “जहर” बनने का खतरा

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खबरवाणी

बढ़ती गर्मी में ठंडे पेय की मांग चरम पर, सैकरीन व मिलावट से “जहर” बनने का खतरा

बुरहानपुर। ज्ञानेश्वर तायडे
शहर में जैसे-जैसे तेज धूप और गर्मी अपना असर दिखा रही है, वैसे-वैसे बाजारों में ठंडे पेय पदार्थों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। हर गली, मोहल्ले और मुख्य बाजारों में ठंडी लस्सी, कोल्ड ड्रिंक, शर्बत और अन्य पेय पदार्थों की दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। लेकिन इस बढ़ती मांग के साथ एक गंभीर खतरा भी सामने आ रहा है—मिलावट और अस्वच्छता का, जो लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
गर्मी से राहत पाने के लिए लोग बड़ी संख्या में ठंडी लस्सी और अन्य पेय पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। कई दुकानों पर लस्सी को अधिक गाढ़ा और आकर्षक बनाने के लिए सैकरीन और अन्य कृत्रिम पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है। सुत्रो के अनुसार, सैकरीन का अधिक उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, खासकर जब इसका इस्तेमाल बिना मानक और नियंत्रण के किया जाए।
गाढ़ापन और स्वाद के नाम पर हो रही मिलावट
शहर में बिक रही कई लस्सियों और ठंडे पेय पदार्थों में कृत्रिम गाढ़ापन लाने के लिए रसायनों और सस्ते पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है। इससे पेय पदार्थ देखने में तो आकर्षक लगते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर यह स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं। कई स्थानों पर बर्फ और पानी की गुणवत्ता भी संदिग्ध पाई जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
कोल्ड ड्रिंक और खुले पेय भी नहीं सुरक्षित
खुले में बिकने वाले शर्बत और स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे कोल्ड ड्रिंक भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माने जा सकते। साफ-सफाई की कमी, दूषित पानी और बिना ढके बर्तनों का उपयोग इन पेय पदार्थों को “जहर” में बदल सकता है। विशेष रूप से गर्मी में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
जांच में असंतुलन, विभाग की भूमिका पर सवाल
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मावा, मिठाई और दूध के सैंपलों की नियमित जांच की जाती है, लेकिन ठंडे पेय पदार्थों की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाले इन पेय पदार्थों की जांच भी उतनी ही सख्ती से होनी चाहिए।
बिना जाच के ठेले और दुकानें
सूत्रों के अनुसार, शहर में कई ठेले और छोटी दुकानों पर बिना किसी वैध पंजीकरण के ठंडे पेय पदार्थों की बिक्री की जा रही है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत ऐसे व्यवसायों के लिए लाइसेंस या पंजीकरण अनिवार्य है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि आम जनता की सेहत भी खतरे में पड़ रही है।
स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर
डॉक्टरों के अनुसार, मिलावटी और अस्वच्छ पेय पदार्थों के सेवन से फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, टाइफाइड और अन्य संक्रमण हो सकते हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और भी अधिक होता है। ऐसे में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
विभाग से सख्त कार्रवाई की उम्मीद
शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि गर्मी के मौसम को देखते हुए विशेष अभियान चलाया जाए और ठंडे पेय पदार्थों की दुकानों की जांच की जाए। साथ ही सैकरीन और अन्य रसायनों के अवैध उपयोग पर रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
कानूनी प्रावधान
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत मिलावटी, अस्वच्छ या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थ बेचने पर जुर्माना और सजा का प्रावधान है। बिना लाइसेंस खाद्य सामग्री बेचने पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
बुरहानपुर में बढ़ती गर्मी के बीच ठंडे पेय पदार्थों की मांग स्वाभाविक है, लेकिन इनकी गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। विभाग की सक्रियता, विक्रेताओं की जिम्मेदारी और उपभोक्ताओं की जागरूकता ही इस समस्या का समाधान कर सकती है, अन्यथा राहत देने वाले ये पेय पदार्थ बीमारी का कारण बन सकते

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