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जहां डर था, वहां अब राम नाम, भौंरा में अखंड रामायण की 21 वर्ष पुरानी परंपरा
पूर्व में हुई दुर्घटनाओं के बाद शुरू हुआ आयोजन, आज बना नगर की शांति का प्रतीक
भौंरा। नववर्ष के अवसर पर नगर स्थित बजरंग मंदिर में आयोजित अखंड रामायण पाठ का गुरुवार को विधिवत समापन हुआ। समापन अवसर पर हवन-पूजन के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर धार्मिक श्रद्धा और भक्ति भाव से ओतप्रोत रहा। यह अखंड रामायण पाठ आशुतोष रामायण मंडल द्वारा संपन्न कराया गया। आयोजन समिति के सदस्य राजू मालवीय, आशुतोष गुप्ता ने बताया कि यह धार्मिक परंपरा विगत 21 वर्षों से निरंतर जारी है। हर वर्ष साल के अंतिम दिन अखंड रामायण पाठ प्रारंभ किया जाता है, जिसका समापन नववर्ष के प्रथम दिन किया जाता है। आयोजन की विशेष बात यह रही कि इसमें नगर के साथ-साथ आसपास के सभी ग्रामों के ग्रामीण भी बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं। ग्रामवासी न केवल पाठ में सहभागिता करते हैं, बल्कि व्यवस्था, सेवा और सहयोग के माध्यम से भी आयोजन को सफल बनाते हैं
आयोजन समिति ने बताया कि यह कार्यक्रम जनसहयोग और सामूहिक आस्था का प्रतीक बन चुका है।
समिति सदस्य अशोक सिरोठिया ने बताया कि लगभग दो दशक पहले नगर में साल के अंतिम दिन और नए साल की शुरुआत के दौरान दुर्घटनाएं और अप्राकृतिक घटनाएं सामने आती थीं। सड़क दुर्घटनाओं सहित कई घटनाओं में लोगों की मृत्यु तक हो चुकी थी, जिससे नगर और आसपास के गांवों में भय का माहौल रहता था। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए नगर की सुख-शांति और जनकल्याण की भावना से अखंड रामायण पाठ की शुरुआत की गई।आयोजन समिति का कहना है कि जब से यह धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हुआ है, तब से नगर में शांति और सकारात्मक वातावरण बना हुआ है तथा किसी बड़ी अनहोनी की घटना नहीं हुई है। यही कारण है कि आज यह आयोजन नगर और ग्रामीण क्षेत्र की आस्था से जुड़ी एक सशक्त परंपरा बन गया है।
समापन अवसर पर हवन-पूजन के बाद प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और नववर्ष के लिए सुख-शांति एवं मंगलकामना की प्रार्थना की।





