बैसाखी भारत के सबसे खुशियों भरे और रंगीन त्योहारों में से एक है। खासकर पंजाब और हरियाणा में इसे बड़े ही जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार किसानों के लिए नई फसल की खुशी लेकर आता है और सिख समुदाय के लिए भी इसका धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है। साल 2026 में बैसाखी 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। आइए देसी अंदाज़ में समझते हैं बैसाखी की तारीख, महत्व और इस त्योहार की खास बातें।
बैसाखी 2026 की सही तारीख
हर साल बैसाखी का त्योहार 13 या 14 अप्रैल के आसपास पड़ता है। यह दिन उस समय आता है जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है।
ड्रिक पंचांग के अनुसार साल 2026 में बैसाखी 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह लगभग 9:38 बजे सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेगा। इसी कारण इस दिन को नए सौर वर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। पंजाब में इसे पंजाबी नव वर्ष की तरह भी मनाया जाता है।
सिख धर्म में बैसाखी का धार्मिक महत्व
बैसाखी का सिख धर्म में बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है। 1699 में इसी दिन दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी।
इस ऐतिहासिक घटना के कारण यह दिन सिख इतिहास में बेहद खास माना जाता है। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन किया जाता है। लाखों श्रद्धालु गुरुद्वारों में माथा टेकने जाते हैं और गुरु साहिब की कृपा के लिए धन्यवाद देते हैं।
किसानों के लिए खुशियों का त्योहार
बैसाखी को किसानों का त्योहार भी कहा जाता है। इस समय तक रबी की फसल जैसे गेहूं पककर तैयार हो जाती है। किसान अपनी मेहनत की फसल देखकर भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं।
गांवों में इस दिन मेले लगते हैं, ढोल बजते हैं और लोग खुशी में झूम उठते हैं। नई फसल की खुशबू और खेतों की हरियाली पूरे माहौल को त्योहार जैसा बना देती है।
बैसाखी पर होने वाले पारंपरिक रंगारंग कार्यक्रम
बैसाखी का जश्न बिना नाच-गाने के अधूरा माना जाता है। पंजाब में इस दिन भांगड़ा और गिद्धा जैसे पारंपरिक नृत्य किए जाते हैं।
ढोल की थाप पर युवा और बुजुर्ग सभी झूम उठते हैं। लोग नए कपड़े पहनते हैं, मेले में जाते हैं और परिवार के साथ मिलकर स्वादिष्ट पंजाबी खाने का आनंद लेते हैं। यह त्योहार असल में खुशियों, भाईचारे और जश्न का दिन होता है।
हिंदू धर्म में भी खास महत्व
बैसाखी केवल सिखों का ही नहीं बल्कि हिंदू धर्म में भी महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन वैशाख माह की शुरुआत होती है और कई धार्मिक कार्यों की शुरुआत भी इसी समय से होती है।
मान्यता है कि इसी महीने से बद्रीनाथ धाम की यात्रा भी शुरू होती है। इसलिए इस दिन लोग स्नान, दान और पूजा-पाठ करके भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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