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US Greenland Conflict: क्या यूरोपियन यूनियन ट्रंप से ग्रीनलैंड को बचा पाएगा? जानिए अमेरिका बनाम EU की असली ताकत

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US Greenland Conflict: अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की जिद पर अड़े हुए हैं। वहीं यूरोपियन यूनियन और नाटो देश इस कदम का खुलकर विरोध कर रहे हैं और ग्रीनलैंड की आजादी के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं।

ट्रंप क्यों चाहते हैं ग्रीनलैंड पर कब्जा

ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे अहम इलाकों में से एक माना जाता है। यहां दुर्लभ खनिज, बर्फ के नीचे छिपे संसाधन और आर्कटिक क्षेत्र पर पकड़ बेहद अहम है। ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा होने से अमेरिका की सैन्य और आर्थिक ताकत कई गुना बढ़ सकती है। इसी वजह से वह किसी भी कीमत पर इसे अमेरिका का राज्य बनाना चाहते हैं।

यूरोपियन यूनियन का पलटवार

यूरोपियन यूनियन के 27 देशों ने एक सुर में ट्रंप के इरादों का विरोध किया है। EU का साफ कहना है कि ग्रीनलैंड कोई सौदे की जमीन नहीं है। यूरोपियन देश ग्रीनलैंड की संप्रभुता और वहां के लोगों के अधिकारों के साथ खड़े हैं। यही नहीं, EU के 27 में से 23 देश नाटो के भी सदस्य हैं, जो सामूहिक सुरक्षा का बड़ा गठबंधन है।

NATO की एंट्री से बदला समीकरण

ग्रीनलैंड को लेकर अब नाटो भी खुलकर सामने आ गया है। यूरोपियन यूनियन और नाटो ने मिलकर ऐलान किया है कि ग्रीनलैंड को सैन्य सुरक्षा दी जाएगी। इसका मतलब साफ है कि अगर अमेरिका ने जबरन कदम उठाने की कोशिश की, तो उसे सिर्फ एक देश नहीं बल्कि पूरे यूरोप और नाटो से टकराना पड़ेगा।

ताकत में कौन भारी अमेरिका या EU

अगर ताकत की बात करें तो अमेरिका आज भी दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है। लेकिन यूरोपियन यूनियन भी कमजोर नहीं है। EU देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था अमेरिका के आसपास ही मानी जाती है। वहीं नाटो के साथ होने से यूरोप की सैन्य ताकत कई गुना बढ़ जाती है। अमेरिका अकेला है, जबकि EU सामूहिक शक्ति के साथ खड़ा है।

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ग्रीनलैंड का भविष्य किस ओर

इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि ग्रीनलैंड खुद क्या चाहता है। ग्रीनलैंड के लोग अमेरिका में शामिल होने के बजाय स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय के पक्ष में दिख रहे हैं। यूरोपियन यूनियन भी यही चाहता है कि ग्रीनलैंड की किस्मत का फैसला वहां की जनता करे, न कि किसी बाहरी ताकत के दबाव में।

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