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युजीसी के खिलाफ सवर्णों ने जुलुस निकालकर सौंपा ज्ञापन, एक फरवरी को बंद आव्हान
मुलताई। देश में हाल ही में लागू किए गए युजीसी नियमों का देश भर में विरोध जारी है। नगर में भी सवर्णो में भी गुस्सा देखने को मिला। गुरुवार को नगर के समस्त सवर्ण संगठन अखिल भारतीय भार्गव सभा, परशुराम सेवा संगठन,वैश्य महासम्मेलन, खंडेलवाल समाज, अग्रवाल समाज,ब्राम्हण समाज, जैन समाज,सिक्ख समाज, राजपूत समाज, रघुवंशी समाज, करणी सेना, मातृ शक्ति सहित अन्य संगठनों द्वारा लामबंद होकर सैकडो की संख्या में विरोध जुलुस निकाला जो नगर के जयस्ंतभ चौक से प्रारंभ होकर मुख्य मार्ग से गांधी चौक होते हुए तहसील कार्यालय पहुचा। जहां संगठनों द्वारा जमकर नारेबाजी करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम राजीव कहार को सौंपा। सौंपे गए ज्ञापन में बताया भारत सरकार द्वारा हाल ही में एक प्रमोशन आफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीटयुशन्स रेगुलेशन्स 2026 लागू किया गया है जिसका मुख्य उददेश्य जातिगत भावना को रोकना है। लेकिन इनके प्रावधान अत्यंत एकांगी, दोषपूर्ण है जो कि सामान्य समाज के साथ भेदभाव पुर्ण है। इस कानुन में अनुसुचित जाति,जनजाति एवं पिछडा वर्ग की सुरक्षा और संरक्षण की लिए विशेष प्रावधान किए गए है। वही सामान्य वर्ग को लिए सुरक्षा की अनदेखी करते हुए सुरक्षात्मक उपाय का अभाव है ।विशेष रूप से नए नियम 3 (सी) में दी गई व्यवस्था अत्यंत भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक प्रतीत होती है। यह समानता को बढ़ावा देने के नाम पर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को परोक्ष रूप से अपराधी की श्रेणी में ला खड़ा करता है और उन्हें कानूनी पचड़ों में फंसाकर उच्च शिक्षा से वंचित करने का षड्यंत्र लगता है। नए प्रावधानों में ‘जातिगत भेदभाव’ की व्यवस्था को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। स्पष्टता के अभाव में इसका दुरुपयोग आपसी संघर्ष और वैमनस्यता को बढ़ाएगा। वही यूजीसी के पुराने नियमों में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने पर शिकायतकर्ता के खिलाफ जुर्माना और निलंबन का प्रावधान था। दुर्भाग्यवश, 13 जनवरी 2026 को लागू नए नियमों में इस सुरक्षा कवच को हटा दिया गया है, जिससे निर्दोष छात्रों के उत्पीड़न की संभावना बढ़ गई है। कानून के अन्तर्गत दो वर्ष के लिए कॉलेज प्रमुख की अध्यक्षता में बनने वाली “समानता समिति” में भी सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व की उपेक्षा की गई है। यह कानून स्पष्ट रूप से यूजीसी के ये नए नियम संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत प्राप्त स्वतंत्रता और समानता के मौलिक अधिकारों को कमजोर करते हैं। किसी भी कानून का दुरुपयोग न हो, यह सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है, जिसकी अनदेखी इस अध्यादेश में की गई है।इस कानून के लागु होने से सामान्य वर्ग (सर्व सवर्ण समाज) स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और अपने भविष्य के प्रति आशंकित है। सरकार के पास नियमों में संशोधन या उन्हें वापस लेने का पूर्ण अधिकार है।सवर्ण समाज ने मांग की है कि 13 जनवरी 2026 को लागू इस विवादास्पद अध्यादेश को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। इसके स्थान पर संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप एक ऐसा संशोधित अध्यादेश लाया जाए जो बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों के विद्यार्थियों को समान सुरक्षा और संरक्षण प्रदान कर सके।विभिन्न संगठनों द्वारा ज्ञापन सौंपते हुए भविष्य बडे आंदोलन की की चेतावनी दी तथा आगामी 1 फरवरी को मुलताई बंद का आव्हान किया गया है।





