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चिकली रैयत में बिना सूचना पेड़ों की कटाई, गांव में तनाव

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खबरवाणी

चिकली रैयत में बिना सूचना पेड़ों की कटाई, गांव में तनाव

समिति को विश्वास में लिए बिना शुरू हुई कार्रवाई पर सवाल, वन विभाग ने बताया नियमों के तहत

भौंरा। चूनाहजूरी रेंज अंतर्गत चिकली रैयत क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग के बीच तनाव की स्थिति बन गई है। वन सुरक्षा समिति और ग्रामवासियों का आरोप है कि समिति, उसके पदाधिकारियों और ग्रामसभा को बिना पूर्व सूचना दिए ही समिति क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की गई, जिससे गांव में असंतोष और अविश्वास का माहौल पैदा हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपकर पूरे प्रकरण की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल उनके जीवन से सीधे जुड़ा हुआ है। जब अचानक कटाई शुरू हुई और किसी तरह की जानकारी नहीं दी गई, तो स्वाभाविक रूप से लोगों में नाराजगी फैल गई। ग्रामीण जीवन यादव ने कहा कि यदि कटाई नियमों के अनुसार है, तो समिति और गांव को पहले क्यों नहीं बताया गया। दिनेश उईके का कहना है कि जानकारी के अभाव में ही शंका और आक्रोश पैदा हुआ है। वहीं ग्राम के लोगों ने कहा कि प्रशासन यदि समय रहते स्थिति को नहीं संभालता है, तो ग्रामीणों को मजबूरी में विरोध का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
वन सुरक्षा समिति अध्यक्ष रामकिशोर उईके ने स्पष्ट किया कि समिति कभी भी वैधानिक कार्य के खिलाफ नहीं रही है, लेकिन समिति क्षेत्र में बिना सूचना पेड़ों की कटाई किया जाना गलत है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों से अनुरोध किया गया था कि कटाई शुरू करने से पहले समिति को जानकारी दी जाए, इसके बावजूद समिति को अंधेरे में रखा गया। समिति सचिव ने कहा कि कटाई की वैधानिकता से अलग, संवाद और पारदर्शिता का अभाव ही पूरे विवाद की जड़ है। यदि समय पर जानकारी दी जाती तो हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते।
वहीं वन विभाग ने समिति के आरोपों को खारिज करते हुए कटाई को वैधानिक प्रक्रिया बताया है। विभाग की ओर से एसडीओ भदोरिया ने कहा कि संबंधित क्षेत्र में पेड़ों की कटाई शासन के आदेशों के अनुसार की जा रही है और इसके लिए उच्च स्तर से अनुमति प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्य निर्धारित परियोजना के अंतर्गत है, जिसकी अवधि पूर्ण होने के कारण कटाई की जा रही है। एसडीओ भदोरिया के अनुसार, इस प्रकार की कटाई पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत संचालित की जा रही है।
हालांकि विभागीय स्पष्टीकरण के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि यदि कटाई पूरी तरह नियमों के अनुसार है, तो समिति और ग्रामीणों में इतना गहरा अविश्वास क्यों है। बिना संवाद की गई कार्रवाई ने वन प्रबंधन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह मामला जिला प्रशासन के समक्ष है, जहां से जांच और समन्वय के जरिए स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद की जा रही है।

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