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ईंट भट्टों से उठता जहरीला धुआं बना बड़ी समस्या हाईवे किनारे लगे भट्टों से राहगीरों, स्कूली बच्चों और पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा

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खबरवाणी

ईंट भट्टों से उठता जहरीला धुआं बना बड़ी समस्या
हाईवे किनारे लगे भट्टों से राहगीरों, स्कूली बच्चों और पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा

ज्ञानेश्वर तायडे
बुरहानपुर शहर और उसके आसपास क्षेत्र में संचालित ईंट भट्टों से निकलने वाला घना और जहरीला धुआं अब आमजन के लिए गंभीर मुसीबत बनता जा रहा है। खासतौर पर शहर से लगे हाईवे और मुख्य मार्गों के किनारे स्थित ईंट भट्टों से निकलने वाला धुआं राहगीरों, वाहन चालकों और आसपास रहने वाले लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन भट्टों से निकलने वाला धुआं नाक और मुंह में जाकर सांस लेने में तकलीफ पैदा करता है, जिससे आंखों में जलन और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

आने-जाने वालों को हो रही भारी परेशानी

प्रतिदिन हजारों लोग शहर से बाहर और शहर के भीतर आवागमन के लिए हाईवे और मुख्य सड़कों का उपयोग करते हैं। इन मार्गों के किनारे लगे ईंट भट्टों से निकलने वाला धुआं कई बार इतना घना हो जाता है कि सड़क पर दृश्यता भी कम हो जाती है। वाहन चालकों का कहना है कि धुएं के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। खासकर सुबह और शाम के समय जब भट्टों में अधिक मात्रा में ईंधन जलाया जाता है, तब स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।

स्कूल जाने वाले बच्चों पर भी खतरा

स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है कि इन ईंट भट्टों के पास से स्कूली बच्चों का भी रोजाना आना-जाना होता है। बच्चों को पैदल या साइकिल से स्कूल जाते समय धुएं के बीच से गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी सेहत पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत, खांसी और आंखों में जलन की शिकायत बढ़ती जा रही है, लेकिन इस ओर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

पर्यावरण को भी हो रहा नुकसान

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, ईंट भट्टों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को बढ़ावा देता है। इस धुएं में मौजूद हानिकारक कण हवा की गुणवत्ता को खराब करते हैं, जिससे न केवल इंसानों बल्कि पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं पर भी असर पड़ता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लगातार प्रदूषण के कारण क्षेत्र की हवा दूषित हो चुकी है और इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है।

सरकारी जमीन पर भट्टे लगाने के आरोप

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ ईंट भट्टे सरकारी जमीन पर लगाए गए हैं। नागरिकों का कहना है कि बिना उचित अनुमति के भट्टों का संचालन किया जा रहा है, जिससे नियमों का उल्लंघन हो रहा है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

नियमों के पालन की उठी मांग

शहरवासियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि ईंट भट्टों के संचालन के लिए तय पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए। यदि भट्टे रिहायशी इलाकों, स्कूल मार्गों और हाईवे के पास स्थित हैं तो उन्हें हटाया जाए या आवश्यक सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण उपाय लागू किए जाएं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि वायु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित विभाग इस मामले में जल्द कार्रवाई करें।

प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में यह गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। लोगों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति का निरीक्षण कर नियमों के अनुसार आवश्यक कदम उठाएंगे, ताकि आमजन, बच्चों और पर्यावरण को इस जहरीले धुएं से राहत मिल सके।

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