Throat Cancer Symptoms: गले का कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अगर इसे शुरुआती दौर में पकड़ लिया जाए तो इलाज संभव है। अक्सर लोग गले की परेशानी, आवाज बैठना या निगलने में दिक्कत को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। देसी भाषा में कहें तो जब शरीर बार बार संकेत दे रहा हो, तब अनदेखी करना भारी पड़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि गले से जुड़ी दिक्कत अगर लंबे समय तक बनी रहे तो जांच कराना बहुत जरूरी है।
तीन हफ्ते से ज्यादा रहें ये दो लक्षण तो हो जाएं सतर्क
कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर अमित चक्रवर्ती के मुताबिक अगर दो खास लक्षण तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक बने रहें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। पहला लक्षण है आवाज में लगातार बदलाव, जैसे आवाज बैठ जाना या भारी लगना। दूसरा लक्षण है खाना निगलने में परेशानी। अगर रोटी या पानी गले में अटकता महसूस हो, दर्द होता हो या निगलने में डर लगे, तो इसे हल्के में न लें।
गले के कैंसर के और भी संकेत
इन दो लक्षणों के अलावा गले के कैंसर के कई और इशारे भी हो सकते हैं। जैसे लगातार गले में खराश, कान में दर्द, गले में गांठ या सूजन महसूस होना। कुछ लोगों को बिना वजह वजन कम होने लगता है। कई बार खांसी के साथ खून आना, सांस फूलना या ऐसा लगना कि गले में कुछ फंसा हुआ है, ये सब भी खतरे के संकेत हो सकते हैं। अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
किन लोगों को ज्यादा रहता है खतरा
गले के कैंसर का खतरा कुछ लोगों में ज्यादा होता है। जो लोग सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या तंबाकू का सेवन करते हैं, उनमें इसका जोखिम बढ़ जाता है। ज्यादा शराब पीने वालों को भी सावधान रहने की जरूरत है। इसके अलावा एचपीवी जैसे वायरल संक्रमण, खराब खानपान, पेट में एसिड की समस्या और जहरीले केमिकल्स के संपर्क में रहने वाले लोगों को भी खतरा हो सकता है।
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समय पर जांच ही है सबसे बड़ा बचाव
अगर गले से जुड़ी कोई भी परेशानी तीन हफ्तों से ज्यादा बनी रहती है तो इंतजार न करें। तुरंत ईएनटी डॉक्टर या कैंसर विशेषज्ञ से जांच कराएं। डॉक्टर स्कैन और एंडोस्कोपी जैसी जांच के जरिए सही कारण पता लगाते हैं। देसी अंदाज में कहें तो बीमारी से भागने से अच्छा है समय रहते उसे पकड़ लेना। सही समय पर जांच और इलाज से गले के कैंसर को हराया जा सकता है।





